इंदौर में 22 सितंबर से एयरपोर्ट के पास बनना शुरू होगी अंडरग्राउंड मेट्रो रेल की सुरंग
Indore Underground Metro Tunnel: 12 सितंबर को टनल बोरिंग मशीन का एसएटी (साइट एक्सपेंस टेस्ट) किया जाएगा। इस प्रक्रिया में टनल बोरिंग मशीन का गोलाकार व...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 08:42:02 AM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 08:58:57 AM (IST)
410 मीट्रिक टन वजनी टनल बोरिंग मशीन को 18 मीटर गहराई में बने शाफ्ट में रखा गया।HighLights
- पहली टनल बोरिंग मशीन ‘नर्मदा’ 18 मीटर गहराई में उतारी, नौ घंटे में पूरी हुई प्रक्रिया
- इंदौर मेट्रो के लिए पहली सुरंग के पास ही समानांतर रूप से दूसरी सुरंग बनाई जाएगी
- यह मशीन एक दिन में छह मीटर तक सुरंग खोदेगी और कांक्रीट की लेयर तैयार करेगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में लंबे समय से धीमी गति से चल रही मेट्रो अब रफ्तार पकड़ेगी। पांच सितंबर को जहां सुपर कारिडोर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का व्यावसायिक संचालन शुरू होगा, वहीं सितंबर के अंत तक भूमिगत मेट्रो का निर्माण कार्य भी रफ्तार पकड़ेगा। एयरपोर्ट के पास बन रहे भूमिगत मेट्रो स्टेशन परिसर में सुरंग बनाने के लिए 410 मीट्रिक टन वजनी टनल बोरिंग मशीन को 18 मीटर गहराई में बने शाफ्ट में उतार दिया गया है।
12 सितंबर को टनल बोरिंग मशीन का एसएटी (साइट एक्सपेंस टेस्ट) किया जाएगा। इस प्रक्रिया में टनल बोरिंग मशीन का गोलाकार व्हील घुमाया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि टनल बोरिंग मशीन सुरंग बनाने के लिए तैयार है। 22 सितंबर को एयरपोर्ट के पास जमीन से 18 मीटर गहराई में मेट्रो की सुरंग बनाने का काम शुरू किया जाएगा।
गुरुवार को टनल बोरिंग मशीन को जमीन में उतारने की प्रक्रिया के दौरान मेट्रो के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य भी मौजूद थे। उन्होंने टीबीएम लांचिंग की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया।
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इस तरह बनेगी सुरंग
- 5.8 मीटर होगा सुरंग का व्यास।
- 6.6 मीटर है टीबीएम की ऊंचाई।
- 18 से 28 मीटर गहराई तक अलग-अलग मेट्रो स्टेशनों में सुरंग बनेगी।
- पहली सुरंग के पास ही समानांतर रूप से दूसरी सुरंग बनाई जाएगी। दोनों टीबीएम समानांतर रूप से सुरंग बनाएंगी।
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नौ घंटे में 18 मीटर गहराई में पहुंची 410 टन वजनी टीबीएम
- गुरुवार सुबह 6.30 से दोपहर 3 बजे के बीच 18 मीटर गहराई में उतारा।
- 40 कर्मचारी टीबीएम की भारी लिफ्टिंग के लिए मौजूद थे।
टनल इफेक्ट ने किया परेशान
शाफ्ट तीन तरफ से बंद था और एक ओर से खुला था। ऐसे में टीबीएम को शाफ्ट में उतारते समय हवा के दबाव ने थोड़ी परेशानी पैदा की। 18 मीटर गहरे शाफ्ट में लोहे की चादर और उसके ऊपर बने क्रेडल स्टैंड पर टीबीएम को रखा गया।
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- नौ माह में बीएसएफ परिसर तक पहुंचेगी टीबीएम
- एयपोर्ट से बीएसएफ तक डेढ़ किमी की सुरंग नौ माह में बनेगी।
- यह एक दिन में छह मीटर तक सुरंग खोदेगी और कांक्रीट की लेयर तैयार करेगी।
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