
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में खादी की चादरों की मांग बढ़ती जा रही है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद मानी जाने वाली इन चादरों ने अब पारंपरिक कपड़ों की जगह लेना शुरू कर दिया है। इसी बढ़ती मांग के चलते इंदौर का खादी ग्रामोद्योग केंद्र प्रदेशभर के अस्पतालों के लिए सप्लाई हब के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। इस वर्ष केंद्र को 20 हजार से अधिक खादी चादरों का ऑर्डर प्राप्त हुआ है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब 18 हजार थी। अस्पताल प्रबंधन अब मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खादी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रदेश के अस्पतालों में बढ़ती खादी की चादरों की मांग में बढ़ोतरी का सीधा असर रोजगार पर भी पड़ा है। पहले जहां केंद्र के साथ मिलकर 35 बुनकर काम करते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच गई है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं और पारंपरिक कारीगरों को स्थायी काम मिल रहा है। इंदौर के अलावा भोपाल, बुरहानपुर, मंदसौर आदि केंद्रों में कार्य हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक खादी की चादरें कई दृष्टिकोण से अस्पतालों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो रही हैं। खादी का कपड़ा प्राकृतिक रेशों, खासकर कपास से तैयार किया जाता है, जो त्वचा के लिए बेहद अनुकूल होता है। इससे मरीजों को एलर्जी या त्वचा में जलन जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। खासतौर पर संवेदनशील त्वचा वाले मरीजों के लिए यह काफी राहतदायक साबित होती है।
इसके अलावा, खादी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘सांस लेने वाली’ बनावट है। यह कपड़ा हवा के आवागमन को आसान बनाता है, जिससे मरीज को गर्मी कम लगती है और उसे अधिक आराम मिलता है। स्वच्छता के लिहाज से यह एक बड़ा लाभ है, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने की संभावना भी कम हो जाती है।
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अस्पतालों में खादी की चादरों के अलावा अब पुलिसकर्मियों की पसंद भी खादी का कपड़ा बनता जा रहा है। पुलिसकर्मी अपनी यूनिफॉर्म खादी के कपड़े की बनवा रहे हैं। यह आरामदायक भी होती है। गर्मी के दिनों में इसमें पसीना आसानी से सूख जाता है। साथ ही त्वचा से संबंधित समस्याएं भी नहीं होती है। इसके अलावा गमछे, साड़ियां, शर्ट के कपड़े ऑर्डर भी आते हैं।
पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार खादी के चादरों की मांग बढ़ी है। यहां से चादर तैयार कर केंद्रीय खादी वस्त्रागार भोपाल भेजी जाती है। वहां से प्रदेशभर में इसकी सप्लाय की जाती है। खादी की मांग बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।- गौरव राज सिंह, प्रबंधक