धार भोजशाला केस: 'हर सर्वे में मिलीं मूर्तियां और संस्कृत श्लोक', एमपी हाई कोर्ट में ASI ने रखा अपना पक्ष
भोजशाला मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में एएसआइ ने अपना पक्ष रखना शुरू किया। एएसआइ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कहा कि यह पहली ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 20 Apr 2026 05:15:19 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Apr 2026 05:15:19 PM (IST)
एमपी हाई कोर्ट में ASI ने रखा अपना पक्षHighLights
- हाई कोर्ट में भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान ASI ने रखा अपना पक्ष
- 1902-03 के पुराने सर्वे में भी मिली थीं मूर्तियां और संस्कृत के श्लोक
- ASI के वकील सुनील जैन बोले- अत्याधुनिक तकनीक से किया गया है नया सर्वे
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में एएसआइ ने अपना पक्ष रखना शुरू किया। एएसआइ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब एएसआइ ने भोजशाला का सर्वे किया हो। इसके पहले भी वर्ष 1902-03 में एएसआइ सर्वे कर चुका है। इसके अलावा भी कई लोगों ने भोजशाला का सर्वे किया है। हर बार सर्वे में भोजशाला में मूर्तियां और संस्कृत में श्लोक लिखे पत्थर मिले हैं।
कोर्ट ने वर्ष 2024 में एएसआइ को भोजशाला के विस्तृत सर्वे के आदेश दिए थे। इसके बाद अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए सर्वे किया गया है।
मुस्लिम पक्ष और इंटरविनर की दलीलें
सुनवाई के दौरान इंटरविनर (हस्तक्षेपकर्ता) की ओर से भी बचे हुए तर्क रखे गए। उन्होंने भोजशाला परिसर को मस्जिद बताते हुए अपना दावा पेश किया। इंटरविनर ने दलील दी कि यह एक मस्जिद है। उन्होंने कोर्ट में कहा कि यदि किसी पक्ष को इसके 'मस्जिद' होने पर आपत्ति है, तो उसे उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत दीवानी वाद (Civil Suit) प्रस्तुत करना चाहिए।