
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर। नेताओं की सभा-रैली में बोतलबंद ठंडे पानी और हजारों लोगों के भोजन की व्यवस्था करने वाला प्रशासन किसानों के लिए न पानी और न खाने की व्यवस्था कर पा रहा है। एक दिन पहले इंदौर की लक्ष्मीबाई नगर अनाज मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू हुई। गुरुवार को थोड़े बहुत किसान उपज लेकर पहुंचे, लेकिन उनके लिए भी साफ पीने के पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी।
खाने का बोर्ड लगाकर कैंटीन सिर्फ दिखाने के लिए खोल दिया गया। वहां खाना तो दूर चाय-बिस्किट तक नहीं थे। अव्यवस्थाओं की शिकायत भोपाल पहुंची तो मंडी सचिव तुरत-फुरत में मौका मुआयना करने पहुंच गए। कैंटीन वाले को समझाया कि थोड़ा-थोड़ा भोजन बना लो। जबकि पानी और कुर्सियों की शिकायत करने वालों को सचिव ने देख लेने की धमकी दे दी।
एक दिन पहले तमाम नेता मंडी में पहुंचे थे और उनके सामने मंडी प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था बता दी थी। गुरुवार दोपहर नईदुनिया टीम मंडी में खरीद स्थल पर पहुंची। चार-पांच ट्रालियों में गेहूं लेकर किसान अपनी उपज बिक्री के लिए वहां मौजूद दिखे। खरीद के लिए बने शेड के एक किनारे किसानों के लिए बैठक व्यवस्था का बोर्ड लगा था।
बैठक व्यवस्था के नाम पर वहां सिर्फ पांच कुर्सियां रखी नजर आईं। दूसरे शेड के सामने पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था का बड़ा-सा बोर्ड लगा नजर आया। हालांकि वहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। पास में लगी टेबल पर एक कर्मचारी किसानों की पर्ची काट रहा था। पूछा कि पीने का पानी कहां है तो किसान ने कहा कि यहां नहीं है। एक कर्मचारी ने बताया कि ठेले पर पानी के मटके रखे हैं वो ठेला आस-पास ही कहीं होगा।
खरीद स्थल के सामने मंडी प्रशासन ने कैंटीन बनाई हुई है। यहां बड़ा साइन बोर्ड लगा दिया गया कि किसानों को पांच रुपये में भोजन मिलेगा। हालांकि असलियत यह थी कि कैंटीन में भोजन तो दूर नाश्ता-चाय और पानी तक नहीं था। काउंटर में रखी सभी बर्नियां खाली थीं। और तो और कढ़ाही में तेल तक नहीं था। कैंटीन के काउंटर पर खड़े कर्मचारी से पूछा गया कि खाना क्यों नहीं है।
इस पर उसने कहा कैंटीन तो बंद थी जिसे चलाना था वो नहीं आया। इस पर मंडी सचिव ने अभी हमसे कह दिया कि यहां आकर खाना खिलाओ। हमें समझ नहीं आ रहा कैसे खाने की व्यवस्था करें। कुछ मिनट में ही मंडी सचिव ओम खेड़े मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कैंटीन वाले से कहा थोड़ा-थोड़ा खाना बनाते रहो। धीरे-धीरे आलू और अन्य व्यवस्था करवा देंगे।
इस बीच मंडी सचिव को खबर लगी कि अव्यवस्थाओं की शिकायत भोपाल पहुंच गई है तो वे खरीदी स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने भड़कते हुए कहा कि किसने शिकायत की है। झूठी शिकायत करने वाले को मैं देख लूंगा। कर्मचारियों से पूछा कितनी कुर्सियां लगाई हैं। इस पर कर्मचारी ने कहा कि 15 की व्यवस्था की है।
पांच यहां लगी हैं बाकी किसान उठाकर इधर-उधर कर देते हैं। पानी के लिए मटके रखा ठेला भी बुलवा लिया है। इस पर सचिव ओम खेड़े से पूछा गया कि खुले मटके में पानी भरकर रख दिया गया है। क्या किसान ऐसा पानी पीएगा। इस पर सचिव ने कहा कि कल तो हमने ठंडे पानी की व्यवस्था की थी।