
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर जिला प्रशासन की जनसुनवाई में अपनी वृद्ध और नेत्रहीन मां के हक के लिए आवाज उठाने वाले दिनेश प्रजापत की गुहार रंग लाई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हस्तक्षेप के बाद परिवार की सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण कर दिया गया है।
इंदौर में मंगलवार को हुई जनसुनवाई के दौरान दिनेश प्रजापत ने अपनी मां रामप्यारी बाई की पेंशन और इलाज न होने पर तीखा विरोध दर्ज कराया था। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद मामले का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रकरण का निराकरण पूरी संवेदनशीलता के साथ कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए वृद्ध रामप्यारी बाई की पेंशन से जुड़ी केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी कराई। इससे पिछले एक साल से बंद पड़ी उनकी पेंशन दोबारा शुरू हो गई है। इसके साथ ही, नेत्रहीन रामप्यारी बाई के स्वास्थ्य को देखते हुए अरविंदो अस्पताल में उनके इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है। सरकार की ओर से परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है।
पेंशन और इलाज के अलावा, प्रशासन अन्य नागरिक सुविधाओं को भी दुरुस्त करने में जुट गया है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से दिनेश और उनकी मां का नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि यह मामला तब चर्चा में आया जब दिनेश अपनी मां को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। वहां लंबे समय से काम न होने और दो महीने से भटकने के कारण उनका गुस्सा फूट पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पिता के निधन के बाद वे बेसहारा हैं और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब मुख्यमंत्री की सक्रियता के बाद दिनेश ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मां का इलाज और पेंशन सुनिश्चित होने से परिवार को बहुत बड़ी राहत मिली है।