इंदौर में फिर 'भागीरथपुरा' जैसी आहट! न्यू पलासिया में 6 महीने से नलों में आ रहा बदबूदार पानी, जनता में भारी आक्रोश
Indore Water Crisis: शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी इंदौर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागने को त ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 02 Feb 2026 10:17:05 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Feb 2026 10:17:05 PM (IST)
इंदौर में फिर 'भागीरथपुरा' जैसी आहट!HighLights
- स्मार्ट सिटी इंदौर में दूषित जल का संकट
- न्यू पलासिया में आ रहा बदबूदार पानी
- लोग कैन खरीदकर प्यास बुझाने को मजबूर
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी इंदौर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागने को तैयार नहीं हैं। एक ओर जहां निगम शहर को स्वच्छ और स्मार्ट बनाने के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर न्यू पलासिया जैसे पॉश इलाके के रहवासी पिछले छह महीनों से दूषित नर्मदा जल पीने को मजबूर हैं। लक्ष्मी मेमोरियल हॉस्पिटल के पास रहने वाले परिवारों के लिए अब नल का पानी प्यास बुझाने के बजाय बीमारी का कारण बनता जा रहा है।
कुओं और बोतलबंद पानी पर निर्भरता
न्यू पलासिया क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि नलों में ड्रेनेज का बदबूदार और काला पानी आ रहा है, जिसकी शिकायत लगातार क्षेत्रीय पार्षद और निगम के आला अफसरों को की जा चुकी है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि लोगों ने अब नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले नर्मदा जल का उपयोग बंद कर दिया है। घर के कार्यों और पीने के लिए लोग कुओं के पानी या फिर बाजार से पानी की कैन (बोतलबंद पानी) खरीदकर अपना गुजारा कर रहे हैं।
निगम की सुस्ती और सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर
अपनी समस्या का समाधान न होता देख स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन वहां से भी उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी। शिकायतों के बाद खानापूर्ति करने पहुंचे नर्मदा प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने जगह-जगह गड्ढे तो खोद दिए, लेकिन लीकेज का सही स्थान खोजने में वे पूरी तरह नाकाम रहे। रहवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि महीनों से जारी इस समस्या पर कोई ठोस तकनीकी समाधान नहीं निकाला जा रहा है।
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नई पाइपलाइन तो बिछी, पर कनेक्शन का इंतज़ार
क्षेत्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए निगम ने इस इलाके में नर्मदा की नई एचडीपीई (HDPE) पाइपलाइन डालने का काम तो पूरा कर लिया है, लेकिन यह केवल कागजों और जमीन के भीतर ही सीमित है। अधिकारियों ने अभी तक इस नई लाइन से घरों में कनेक्शन नहीं दिए हैं। नतीजतन, लोग अभी भी उसी पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन पर निर्भर हैं, जिसमें ड्रेनेज का पानी मिलकर उनके घरों तक पहुंच रहा है। भागीरथपुरा की त्रासदी को याद कर अब यहां के रहवासी किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं।