'अगर रामचंद्र नाम का शख्स एक शादी करेगा तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा', एमपी सीएम मोहन यादव ने यूसीसी पर जोर देते हुए कहा
सीएम मोहन यादव ने यूसीसी का समर्थन करते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ नहीं होने चाहिए और कानून के तहत सभी के साथ एक जैसा...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 11:31:33 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 11:55:17 PM (IST)
सीएम मोहन यादव।HighLights
- राज्य सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को 'हिंदू-मुस्लिम नजरिए' से देखा।
- कांग्रेस ने और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग नहीं लेने का फैसला किया।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को एक भाषण में संकेत दिए कि प्रदेश में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होगा तो नियम सभी के लिए समान होंगे, भले ही वह किसी भी धर्म का हो। उन्होंने यूसीसी का समर्थन करते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ नहीं होने चाहिए और कानून के तहत सभी के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "जब हमारा देश एक है, तो अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए? अगर रामचंद्र नाम का व्यक्ति एक बार शादी करता है, तो रहीम नाम के व्यक्ति से भी सिर्फ़ एक बार शादी करने की उम्मीद की जा सकती है।"
उनकी यह बात मध्य प्रदेश के लिए यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का ड्राफ़्ट तैयार करने के लिए बनी कमेटी के मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद आई है।
इंदौर जिला अस्पताल में 300 बिस्तरों के भवन के उद्घाटन के अवसर पर यादव ने कहा कि राज्य सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में UCC बिल लाने की योजना पर आगे बढ़ रही है।
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समिति ने अभी तक 10 लाख नागरिकों से लिए सुझाव
- यादव के अनुसार, कमिटी ने अलग-अलग धर्मों, समुदायों और राजनीतिक पार्टियों के लोगों से बातचीत की और राज्य भर में 10 लाख से ज़्यादा नागरिकों से सुझाव लिए हैं।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को 'हिंदू-मुस्लिम नजरिए' से देखा और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग नहीं लेने का फैसला किया।
- उन्होंने कहा, "मैं जिम्मेदारी से कहना चाहूंगा कि UCC पर भी कांग्रेस ने अपना सामान्य दोहरा रवैया अपनाया।
- अपने वोट बैंक की हिस्सेदारी के कारण कांग्रेस समिति की मीटिंग में शामिल नहीं हुई और UCC पर अपनी राय व्यक्त नहीं की।"