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    घुसपैठ की समस्या देश में अशांति पैदा कर सकती है, जरूरत पड़ने पर कमेटी इससे निपटने के लिए और कड़े कानूनों की सिफारिश कर सकती है: जस्टिस नावलेकर

    डेमोग्राफिक बदलावों का आकलन करने वाली उच्च-स्तरीय कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर ने घुसपैठ के कारण होने वाले ...और पढ़ें

    By Digital DeskEdited By: manoj dubey
    Publish Date: Fri, 29 May 2026 06:43:35 PM (IST)Updated Date: Fri, 29 May 2026 06:54:59 PM (IST)
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    घुसपैठ की समस्या देश में अशांति पैदा कर सकती है, जरूरत पड़ने पर कमेटी इससे निपटने के लिए और कड़े कानूनों की सिफारिश कर सकती है: जस्टिस नावलेकर
    डेमोग्राफिक बदलावों का आकलन करने वाली उच्च-स्तरीय कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर। फाइल फोटो

    HighLights

    1. डेमोग्राफिक बदलावों का आकलन करने वाली उच्च-स्तरीय कमेटी के प्रमुख हैं
    2. लोग घुसपैठ के जरिए अवैध रूप से प्रवेश करते हैं, तो असर पूरे देश पर पड़ता है
    3. गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उच्च-स्तरीय कमेटी के गठन की घोषणा की थी

    नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। डेमोग्राफिक बदलावों का आकलन करने वाली उच्च-स्तरीय कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर ने घुसपैठ के कारण होने वाले डेमोग्राफिक बदलाव को एक बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कमेटी केंद्र सरकार को और कड़े कानूनों की सिफारिश कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि घुसपैठ की समस्या देश में अशांति भी पैदा कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि कमेटी विषय विशेषज्ञों की मदद से इस मुद्दे की जांच करेगी।

    शाह ने उच्च-स्तरीय कमेटी के गठन की घोषणा की थी

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय कमेटी के गठन की घोषणा की थी। इस कमेटी का काम पूरे भारत में 'अवैध प्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों' से होने वाले डेमोग्राफिक बदलावों का आकलन करना और इन चुनौतियों से निपटने के उपाय सुझाना है।


    डेमोग्राफिक बदलाव एक बड़ी चुनौती है

    इंदौर में समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कमेटी के चेयरमैन जस्टिस नावलेकर ने कहा, डेमोग्राफिक बदलाव एक बड़ी चुनौती है। जब लोग घुसपैठ के जरिए अवैध रूप से देश में प्रवेश करते हैं, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत गरीबों को सहायता देती है, लेकिन घुसपैठ के कारण यह सहायता बंट जाती है।

    उन्हें भी सरकारी सहायता देनी पड़ती है जो इसके हकदार नहीं

    सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा, हमें उन लोगों को भी सरकारी सहायता देनी पड़ती है जो इसके हकदार नहीं हैं। नतीजतन जो लोग वास्तव में इस सहायता के हकदार हैं, उनका हिस्सा कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि घुसपैठ की समस्या देश में अशांति भी पैदा कर सकती है। इसीलिए सरकार घुसपैठियों की पहचान करना चाहती है और यह पता लगाना चाहती है कि किन इलाकों में उनकी संख्या सबसे ज्यादा है।

    लगा कि और कड़े कानूनों की जरूरत है, तो कमेटी सिफारिश कर सकती है

    जब उनसे पूछा गया कि क्या देश में घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी ढांचा मौजूद है, तो जस्टिस नावलेकर ने जवाब दिया कि अगर उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी को लगा कि और कड़े कानूनों की जरूरत है, तो वह सरकार को इसकी सिफारिश कर सकती है।

    उन्होंने विभिन्न अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानूनों और सरकारी तंत्र द्वारा उनके सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस नावलेकर ने कहा, किसी का भी इस बात पर कोई नियंत्रण नहीं होता कि कोई व्यक्ति कैसा व्यवहार करेगा। लेकिन अगर कोई व्यक्ति गलत काम करने पर सख्त सजा से डरता है, तो उसके गलत काम करने से बचने की संभावना ज्यादा होती है।

    डेमोग्राफिक बदलाव सिर्फ सीमावर्ती इलाकों तक ही सीमित नहीं

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की हाई-लेवल कमेटी बनाने से जुड़ी अधिसूचना में कहा गया है कि गैर-कानूनी माइग्रेशन की वजह से होने वाले डेमोग्राफिक बदलाव सिर्फ सीमावर्ती इलाकों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी क्षेत्रों और दूसरे सामाजिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील इलाकों तक भी फैल गया है।

    ...तो हमारे संसाधनों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा

    कमेटी के चेयरमैन ने कहा यह बहुत ही गंभीर मामला है। पहले हम गैर-कानूनी माइग्रेशन की वजह से होने वाले डेमोग्राफिक बदलावों से होने वाले नुकसान को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे इलाकों में ही देखते थे। अगर यह समस्या पूरे देश में फैल गई, तो हमारे संसाधनों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि गैर-कानूनी माइग्रेशन की वजह से होने वाला डेमोग्राफिक बदलाव एक वैश्विक घटना लगती है। हम अखबारों में पढ़ और सुन रहे हैं कि फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश भी इस समस्या से जूझ रहे हैं।

    दस्तावेज इकट्ठा करने होंगे और कुछ जगहों का दौरा करना होगा

    उन्होंने कहा कि उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी के पास अगर जरूरी हो, तो अपने सदस्यों के अलावा, अलग-अलग क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों से भी राय लेने का अधिकार है। हमें जितनी हो सके उतनी ज्यादा जानकारी और दस्तावेज इकट्ठा करने होंगे। हमें कुछ जगहों का दौरा भी करना होगा। काम शुरू करने के बाद कमेटी उपलब्ध सामग्री के आधार पर मिलकर तय करेगी कि कहां जाना है।

    डेमोग्राफिक बदलावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी कमेटी

    सरकार के अनुसार, हाई-लेवल कमेटी देश के अलग-अलग क्षेत्रों में गैर-कानूनी इमिग्रेशन और दूसरे असामान्य कारणों से हो रहे डेमोग्राफिक बदलावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी, उनके कारणों की जांच करेगी और उचित नीतिगत, विधायी और प्रशासनिक उपायों का सुझाव देगी।

    यह भी पढ़ें- देश में बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर, एमपी-छत्तीसगढ़ भी इस लिस्ट में शामिल, SRS रिपोर्ट में खुलासा

    एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी कमेटी

    कमेटी में जनगणना आयुक्त, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के पूर्व अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, और डॉ. शमिका रवि सदस्य के तौर पर शामिल हैं। यह पैनल एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। अगर जरूरी हुआ, तो गृह मंत्रालय कमेटी का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा सकता है।