
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे के दावों को लेकर इंदौर जिला न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम की है। कोर्ट ने अपने एक फैसले में माना है कि पिता की मृत्यु के समय यदि बच्चा मां के गर्भ में है, तो भी उसे पिता की आय पर 'आश्रित' माना जाएगा। इस आधार पर कोर्ट ने मृतक पुलिस आरक्षक के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को भारी क्षतिपूर्ति राशि देने का निर्देश दिया है।
यह मामला मध्य प्रदेश पुलिस के आरक्षक सतीश रूडेले से जुड़ा है। 8 जुलाई 2021 को सतीश अपने तीन मित्रों—अनिल, आकाश और मुकेश के साथ कार से भोपाल जा रहे थे। रात करीब एक बजे जब कार हाईवे के किनारे खड़ी थी और सतीश लघुशंका के लिए गाड़ी से बाहर निकले, तभी एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में सतीश की मौके पर ही मौत हो गई।
सतीश की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी रेखा और परिवार के अन्य सदस्यों ने ट्रक का बीमा करने वाली कंपनी के खिलाफ जिला न्यायालय में क्लेम दाखिल किया। बीमा कंपनी ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए भुगतान से इनकार कर दिया था। हालांकि, पीड़ित परिवार की ओर से पैरवी करते हुए तर्क दिया गया कि सतीश एक सरकारी कर्मचारी थे और उनके पास भविष्य में तरक्की के काफी अवसर थे। सबसे महत्वपूर्ण तर्क यह था कि हादसे के वक्त उनकी पत्नी गर्भवती थीं, इसलिए होने वाले बच्चे को भी पिता का आश्रित माना जाना चाहिए।
मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को देखते हुए कोर्ट ने माना कि गर्भस्थ शिशु भले ही दुर्घटना के समय दुनिया में नहीं आया था, लेकिन वह भरण-पोषण के लिए पूरी तरह अपने पिता की आय पर निर्भर था। कोर्ट ने परिवार के तर्कों को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह मृतक आरक्षक के आश्रितों को 50 लाख 88 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करे।
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न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी को केवल मूल राशि नहीं, बल्कि प्रकरण प्रस्तुत किए जाने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक दर के हिसाब से ब्याज भी चुकाना होगा। इस फैसले से न केवल पीड़ित परिवार को बड़ा आर्थिक संबल मिला है, बल्कि भविष्य के ऐसे मामलों के लिए 'गर्भस्थ शिशु के अधिकार' को लेकर एक स्पष्ट दिशा भी तय हुई है।