
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सिंहस्थ के पहले उज्जैन को जोड़ने वाली पश्चिमी रिंग रोड का निर्माण अभी तक शुरू हो पाया है, क्योंकि कुछ हिस्से की जमीन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को मिलना बाकी है। जमीन का उचित मूल्य नहीं मिलने से नाराज किसान अपनी भूमि देने को राजी नहीं हैं।
उच्च न्यायालय में प्रकरण होने से 20 प्रतिशत से ज्यादा जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया रुकी है। इससे सालभर प्रोजेक्ट पिछड़ चुका है। सड़क का काम पिछले साल फरवरी में शुरू होना था, जबकि 50 हेक्टेयर वनभूमि को लेकर रास्ता साफ हो गया है।
यहां तक कि एनएचएआई को जंगल की जमीन पर काम करने की अनुमति भी मिल गई है। पीथमपुर से शिप्रा के बीच 64 किमी लंबी सड़क बनाई जाएगी। यह पीथमपुर से बेटमा, काली बिल्लौद, यशवंत सागर, सांवेर, तराना और शिप्रा तक जाएगी, जो उज्जैन को जोड़ेगी।
पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट को बनाने में 3000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। सड़क निर्माण को लेकर अहमदाबाद की एजेंसी आठ महीने पहले तय हो चुकी है। पूरे प्रोजेक्ट में 638 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। यह सड़क मार्च 2028 यानी सिंहस्थ तक पूरी होना है। मगर जमीन से जुड़े विवाद नहीं सुलझ रहे हैं। इससे काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। नियमानुसार 80 फीसद जमीन अधिग्रहण के बाद ही सड़क का काम शुरू हो पाएगा।
प्रोजेक्ट में इंदौर-धार वनमंडल में आने वाली 50 हेक्टेयर वनभूमि की प्रक्रिया पूरी हो गई है। 12 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से राशि दी गई है, जो छह करोड़ जमीन के लिए दिए गए हैं।
शेष चार से पांच करोड़ रुपये पौधे लगाने पर खर्च होंगे। इस तरह अभी एनएचएआई ने दस करोड़ जमा करवा दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक 41 हेक्टेयर इंदौर और नौ हेक्टेयर धार वनमंडल की जमीन है।
पश्चिमी रिंग रोड के लिए भले ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन एनएचएआई सड़क को दो हिस्सों में बनाएगा। 34 किमी की सड़क बनाने में 1534 करोड़ खर्च होंगे। इसके लिए 27 किमी की निजी जमीन की जरूरत है।
वहीं 30 किमी हिस्से का काम करने में 1431 करोड़ का खर्च आएगा। लगभग 24 किमी की जमीन की प्रक्रिया चल रही है। प्रोजेक्ट की लागत इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि किसानों को दिए जाने वाला मुआवजा बढ़ाकर दिया जा रहा है।