
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। तेजाजी नगर थाने का चर्चित ड्रग्स केस फर्जी निकला है और इसमें ट्रेनी आईपीएस अफसरों की भूमिका संदिग्ध निकली है। यहां छवि चमकाने के मकसद से यूरिया को ड्रग्स बता दिया गया था। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी है। तेजाजी नगर पुलिस ने पिछले साल 26 फरवरी को मोहम्मद शाहनवाज शेख और विजय पाटीदार को मादक पदार्थ (एमडी) के साथ पकड़ा था।
उस वक्त ट्रेनी आईपीएस आदित्य सिंघारिया थाना प्रभारी और करणदीप सिंह एसीपी के रूप में पदस्थ थे। अफसरों ने आजाद नगर थाने के सिपाही लखन को भी गिरफ्तार किया और दावा किया कि उसकी मदद से ही क्षेत्र में ड्रग्स बिक रही थी।
केस में अहम मोड़ उस वक्त आया, जब फॉरेंसिक जांच में जब्त पदार्थ यूरिया निकला। जोन-1 के डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने हैदराबाद की सीएफएसल लैब से री-टेस्टिंग करवाई लेकिन उसमें भी जब्त पदार्थ पोटेशियम नाइट्रेट ही बताया गया।
इस पर पुलिस बैकफुट पर आई और सभी आरोपितों के विरुद्ध खारजी पेश कर दी गई। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) नरसिंह बघेल ने खारजी स्वीकृत कर ली।
वकील नितिन पाराशर के अनुसार, आरोपित शाहनवाज की पत्नी ने उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का आवेदन दिया था। एसीपी करणदीप ने शाहनवाज की गिरफ्तारी करवाई और ड्रग्स का केस बनाने की साजिश की। वकील के अनुसार शाहनवाज को आधार बनाकर लखन और विजय की गिरफ्तारी कर ली। कोर्ट द्वारा खारजी स्वीकारने के बाद आरोपित हाईकोर्ट में परिवाद दायर करेंगे।
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एफआईआर के मुताबिक 26 फरवरी 2025 को एसआई मनोज दुबे, प्रधान आरक्षक देवेंद्र परिहार,आरक्षक अभिनव शर्मा,गोविंदा,दीपेंद्र राणा के साथ रालामंडल क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। बाइक सवारों को संदिग्ध अवस्था में देखा और तलाशी ली।
पुलिसवालों ने 198 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स जब्ती दर्शा दी। जब्ती की कार्रवाई में एसआई रवि बट्टी भी शामिल थे। उन्होंने अनुभव (सूंघकर) के आधार पर बताया कि जब्त पदार्थ एमडी ड्रग्स ही है।