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इंदौर में सड़क हादसों में 65 प्रतिशत मौतें 18 से 35 उम्र के युवाओं की, आंकड़े बढ़ा रहे चिंता

Indore Road Accident: दुर्घटनाओं में ओवरस्पीड 154 मामलों के साथ प्रमुख कारण के रूप में दर्ज है। शहर में कई ब्लैक स्पाट पर दुर्घटनाओं के बाद सुधार कार्...और पढ़ें

By Pranay ChouhanEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 05 Sep 2026 08:33:13 AM (IST)Updated Date: Sat, 05 Sep 2026 09:01:17 AM (IST)
इंदौर में सड़क हादसों में 65 प्रतिशत मौतें 18 से 35 उम्र के युवाओं की, आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
वाहन चालकों की जांच करते पुलिस अधिकारी।

HighLights

  1. शाम छह से नौ बजे तक डेंजर आवर
  2. भीड़ के दौरान सबसे ज्यादा हादसे
  3. आठ महीने में 3.33 लाख चालान

प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर। सुबह से रात तक सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की लंबी कतारें दिखती हैं और शाम होते-होते खतरा और बढ़ जाता है। यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के आंकड़े इंदौर की सड़कों की चिंताजनक स्थिति उजागर करते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 65 प्रतिशत से अधिक 18 से 35 वर्ष के युवा वाहन चालक हैं।

यह सबसे गंभीर चिंता का विषय है। दुर्घटनाओं के आंकड़ों में शाम छह से रात नौ बजे का समय सबसे जोखिम भरा पाया गया है। इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक 3.33 लाख से अधिक चालान किए गए, यानी औसतन हर दिन करीब 1370 वाहन चालकों पर कार्रवाई हुई।


ये आंकड़े सिर्फ नियम तोड़ने वालों की संख्या नहीं बताते, बल्कि उस चुनौती की ओर इशारा करते हैं जिसमें बढ़ता ट्रैफिक, तेज रफ्तार और अनुशासन की कमी के बीच शहर को सुरक्षित रखना कठिन हो रहा है। दिनभर हेलमेट, पार्किंग, मोबाइल, सिग्नल और अन्य नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होती है, लेकिन शाम के व्यस्त समय में सड़क हादसों का दबाव सबसे ज्यादा देखा जाता है।

इंदौर का ‘डेंजर आवर’

समयवार विश्लेषण में शाम छह से नौ बजे के बीच 30 हादसे दर्ज हुए, जो प्रमुख समय खंडों में सर्वाधिक हैं। इसके बाद रात नौ से 12 बजे के बीच भी 25 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। कार्यालय और बाजार से लौटने की भीड़, व्यावसायिक गतिविधियां और अलग-अलग दिशाओं में बढ़ती वाहन आवाजाही सड़कों पर दबाव बढ़ाती है।

ओवरस्पीडिंग और ब्लैक स्पॉट बड़ा खतरा

दुर्घटनाओं में ओवरस्पीड 154 मामलों के साथ प्रमुख कारण के रूप में दर्ज है। शहर में कई ब्लैक स्पॉट पर दुर्घटनाओं के बाद सुधार कार्यों की जरूरत रिपोर्ट में दर्ज है। कहीं रंबल स्ट्रिप, स्पीड ब्रेकर, रोड मार्किंग, कैमरे, सुरक्षा जालियां और अतिक्रमण हटाने जैसे उपाय सुझाए गए हैं।

आठ महीने में पिछले साल से डेढ़ लाख ज्यादा चालान

वर्ष 2025 में पूरे साल 1,79,920 चालान हुए थे। इसके मुकाबले 2026 में 31 अगस्त तक ही 3,33,831 चालान किए गए। यानी आठ महीने में कार्रवाई का आंकड़ा पिछले पूरे वर्ष से करीब 1.54 लाख अधिक। प्रतिदिन औसतन 1370 चालान। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों का है। इसके अलावा रांग पार्किंग, शराब पीकर वाहन चलाना, नंबर प्लेट संबंधी उल्लंघन, सिग्नल तोड़ना और मोबाइल का उपयोग भी बड़ी संख्या में हैं।

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एडीसीपी संतोष कुमार कौल से सीधी बात

सवाल : सबसे चिंताजनक तथ्य क्या है?

जवाब : सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 65 प्रतिशत से ज्यादा 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवा वाहन चालकों की हैं।

सवाल : यातायात विभाग ने क्या कदम उठाए?

जवाब : नगर निगम, एनएचएआइ, एमपीआरडीसी, पीडब्ल्यूडी व आइडीए को दुर्घटनाएं कम करने के लिए आवश्यक सुधार कार्य के निर्देश दिए हैं।

सवाल : सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं कहां?

जवाब: अधिकांश दुर्घटनाएं एनएचएआई की सड़कों पर हो रही हैं।

सवाल : एनएचएआइ सड़कों पर हादसों का कारण?

जवाब : ग्रामीण क्षेत्रों में रहवासी डिवाइडर में अनधिकृत ‘शार्ट कट’ बना देते हैं। इनसे वाहन अचानक दिशा बदलते हैं और दुर्घटना की आशंका बढ़ती है।

सवाल : आगे क्या होगा?

जवाब: चिह्नित दुर्घटना स्थलों पर संबंधित एजेंसियों के माध्यम से आवश्यक सुधार कार्य कराए जाएंगे।

फैक्ट फाइल

  • 3,33,831 : जनवरी-अगस्त 2026 तक कुल चालान
  • 1370 : प्रतिदिन औसत चालान
  • 1,79,920 : पूरे वर्ष 2025 में कुल चालान
  • 30 : शाम छह-नौ बजे के बीच हादसे (औसतन)
  • 154 : ओवरस्पीड से जुड़े मामले

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