

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नेहरू ने विभाजन का निर्णय जल्दबाजी में लिया था। जब विभाजन होता है तो विस्थापन होता है, लेकिन इसकी कोई तैयारी नहीं की गई। करोड़ों लोग आएंगे तो कहां ठहरेंगे इसकी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा मानव ट्रांसफर था।
डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए थे। 14 अगस्त के दिन 20 लाख लोगों की हत्या हुई थी। तत्कालिक शासकों की पार्टी आज भी उसी नीति पर चल रही है। उन्हें सोचना चाहिए कि स्वतंत्रता के बाद जैसे देश को बर्बाद किया, वे उस नीति को छोड़ दें। यह बात कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को भाजपा द्वारा आयोजित संगोष्ठी के बाद मीडिया से चर्चा में कही।
भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस निकाला और संगोष्ठी आयोजित की। इसमें विजयवर्गीय ने कहा कि 14 अगस्त वह काला दिन है, जब देश में एक तरफ स्वतंत्रता का जश्न मनाया जा रहा था तो दूसरी ओर चीत्कार और विभाजन का दर्द था।
14 अगस्त को भारत माता ने जो दर्द सहा था उसे भूलना नहीं चाहिए। वर्ष 1929 में रावी के तट पर कांग्रेस के नेताओं ने पूर्ण स्वराज की कसम खाई थी। वह रावी का तट हमारे पास है क्या। पंजाब जो कि पांच नदियों से मिलकर बना था, क्या वह पांच नदियां हैं।
राष्ट्र का विभाजन हुआ, 15 अगस्त 1947 को झंडा वंदन हुआ तब भी यह नहीं पता था कि विभाजन की सीमा रेखा क्या होगी। भारत का विभाजन बंद कमरे में बैठकर तय हुआ था। उस वक्त श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंग देश को बचाने के लिए आंदोलन किया। आज जो आधा कश्मीर और आधा बंगाल हमारे पास है, उसका श्रेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को जाता है। विभाजन का जो दर्द लोगों ने सहा है, उसे आने वाली पीढ़ी को बताना चाहिए।
संगोष्ठी में आरएसएस के ईश्वर हिंदुजा ने कहा कि विभाजन में लोगों ने आत्म बलिदान भी किया। महिलाओं ने अस्मत बचाने के लिए कुओं में कूदकर जान दी। उस वक्त बच्चों को भाले पर लटकाकर हत्या की जा रही थी। यह सिर्फ विभाजन नहीं था बल्कि वीभत्स अत्याचार था, नृशंस और अमानवीय अत्याचार था।
समाजसेवी अजित सिंह नारंग ने कहा कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभाजन विभीषिका दिवस मनाने की घोषणा की ताकि उन लाखों निर्दोष लोगों को, जिनका कोई कसूर नहीं था और जिन्हें मौत के घाट उतार दिया गया, उनको श्रद्धांजलि दी जा सके।
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दुनिया को संदेश दिया जा सके, कि यह धर्मांधता, कट्टरता, अलगाववाद कितना खतरनाक होता है। आयोजन में भाजपा नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला आदि भी शामिल हुए।
संगोष्ठी से पहले भाजपा ने मौन रैली भी निकाली। इसमें महिलाएं विरोध स्वरूप काले वस्त्रों में शामिल हुईं। कार्यकर्ता हाथ में विभाजन के विरोध की तख्तियां लेकर चल रहे थे। भाजपा कार्यालय पर विभाजन की विभीषिका विषय पर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया।