
नईदुनिया प्रतिनिधि ,इंदौर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार सुबह इंदौर की आइटी-केपीओ कंपनी इंकग्राफ पर छापा मारा। पीयू-फोर स्थित कंपनी के दफ्तर के साथ इसके संचालको अर्पित जोशी और अपूर्व जोशी के महालक्ष्मी नगर स्थित घर पर भी ईडी के अधिकारियों ने दबिश दी। जांच में ईडी के दस से ज्यादा अधिकारी शामिल है।
स्थानीय अधिकारियों के साथ दिल्ली से आए अधिकारी भी जांच में जुटे हैं। इंदौर की ये आइटी कंपनी अमेरिका के फ्लोरिडा में भी अपना दफ्तर चला रही है। गेमिंग-क्रेडिट कार्ड और अन्य संदिग्ध विदेशी भुगतान और फंड डायवर्ट करने को लेकर कंपनी जांच के दायरे में आई है।
देशभर में ईडी धनशोधन अधिनियम, कालेधन और फारेन एक्सजेंच मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत अवैध स्त्रोतों से धन हासिल करने और डायवर्ट करने के मामले में जांच कर रही है। बीते दिनों में ईडी ने गेमिंग कंपनियों और अन्य संदिग्ध संस्थानों पर देशभर में कार्रवाई की थी। उसी की अगली कड़ी में अब ईडी की यह कार्रवाई चल रही है। हालांकि फिलहाल ईडी की ओर से कार्रवाई को लेकर किसी तरह का बयान जारी नहीं किया है। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे ईडी के अधिकारी कंपनी के दफ्तर के बाहर पहुंच गए थे।
इसी दौरान दो टीमें कंपनी के कर्ताधर्ता जोशी बंधुओं के महालक्ष्मी नगर स्थित घर पर भी पहुंचे। बाद में संचालकों को दफ्तर लॉकर रिकॉर्ड की तलाशी और पूछताछ शुरू हुई। शाम को कंपनी के कुछ कर्मचारियों को भी बुलाकर ईडी के अधिकारियों ने पूछताछ की। रात तक जांच जारी थी और इलैक्ट्रानिक रिकार्ड के साथ लेन-देन का हिसाब और अन्य दस्तावेज तलब किए जा रहे थे।
पीयू फोर में स्थित इंकग्राफ नामक कंपनी को दो सगे भाई अर्पित और अपूर्व जोशी चला रहे थे। करीब दस वर्षों से कंपनी यहां काम कर रही थी। कंपनी के छोटे से दफ्तर में बमुश्किल 40 कर्मचारी काम कर रहे थे। कंपनी के कर्मचारी शाम चार बजे और छह बजे दफ्तर आते थे और तड़के तीन-चार बजे काम खत्म कर दफ्तर बंद कर दिया जाता था। संचालकों की ओर से स्थानीय पुलिस को साफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी की जानकारी देकर अलग-अलग शिफ्टों में काम होने के कारण रात को भी दफ्तर खुले रखने की अनुमति ली गई थी।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और यूरोप की कुछ अन्य कंपनियों, क्रेडिट कार्ड और गेमिंग कंपनियों के लिए आउटसोर्स बैकआफिस और काल सेंटर यहां संचालित हो रहा था। विदेशी ग्राहकों के लिए पेमेंट गेटवे मैनेजमेंट का काम भी कंपनी कर रही थी। इस दौरान संदिग्ध लेन-देन और फंड ट्रांसफार को लेकर कंपनी जांच के दायरे में आई है। कंपनी के कर्मचारियों को अवकाश भी विदेशी छुट्टियों के हिसाब से दिया जाता था।