
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एमआईजी थाना पुलिस ने साइबर ठगी के लिए फर्जी सिमकार्ड उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क का राजफाश किया है। आपरेशन फास्ट-2.0 के तहत हुई जांच में चौंकाने वाली जानकारी मिली है। ठगों ने महज 200 रुपये में सिमकार्ड खरीदकर 500 रुपये में आगे बेच दिया। इसके बाद यह सिमकार्ड साइबर ठगों तक पहुंचा। पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया है जबकि तीन आरोपित फरार है।
एडिशनल डीसीपी जोन-2 अमरेंद्र सिंह के मुताबिक, जांच आइ4सी (इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर) गृह मंत्रालय से मिले डाटा के आधार पर शुरू हुई थी। इंदौर नगरीय क्षेत्र में 49 संदिग्ध पीओएस (बिक्री का स्थान) धारकों और सिम विक्रय एजेंटों से जुड़ी 151 संदिग्ध सिमकार्ड की जानकारी मिली थी। इन सिमकार्ड का इस्तेमाल देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 212 वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों में पाया गया।
पुलिस ने संबंधित पीओएस कोड के सिमकार्ड विक्रेता रोहित दलवे से पूछताछ की। उसने बताया कि उसने 15 मार्च 2026 को दस्तावेजों का मिलान कर राजेश चौधरी के नाम पर सिमकार्ड जारी किया था। राजेश ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने आधार कार्ड पर सिमकार्ड लिया था। बाद में 200 रुपये लेकर भगवानदास उर्फ नाना को दे दी।
भगवानदास ने 500 रुपये में हिमांशु जुनवाल को बेच दी और हिमांशु ने यह सिमकार्ड आशीष शर्मा को दिया। जांच में पता चला कि इसी सिमकार्ड का इस्तेमाल आशीष ने साइबर ठगी के लिए किया। आरोपित लोगों को कम कीमत पर जींस-पैंट उपलब्ध कराने और फ्रेंचाइजी देने का झांसा देते थे। रुपये लेने के बाद सामान नहीं देते थे।
उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के अनिल कुमार गुप्ता से भी इसी तरह संपर्क किया गया। उन्हें झांसा देकर 10 हजार रुपये ले लिए गए। अनिल ने 27 मई को शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि भगवानदास उर्फ नाना, हिमांशु उर्फ रोहित जुनवाल और आशीष की तलाश जारी है।