उज्जैन में नदी किनारे रहने वालों को राहत, इंदौर हाई कोर्ट ने मकान तोड़ने पर रोक लगाते हुए निगम से मांगा जवाब
उज्जैन मास्टर प्लान में शिप्रा नदी के दोनों और 200 मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है। एडवोकेट अमन मालवीय ने बताया कि इस क्षेत्र में कई लोग ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 27 Mar 2026 09:11:46 PM (IST)Updated Date: Fri, 27 Mar 2026 09:14:56 PM (IST)
इंदौर हाई कोर्ट।नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। उज्जैन में शिप्रा किनारे रह रहे लोगों को हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम द्वारा उनके मकान तोड़ने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि निगम पहले रहवासियों को सुनवाई का अवसर देगा, इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
उज्जैन मास्टर प्लान में शिप्रा नदी के दोनों और 200 मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है। एडवोकेट अमन मालवीय ने बताया कि इस क्षेत्र में कई लोग 50 साल से भी अधिक समय से निवास कर रहे हैं। उज्जैन निगम ने मास्टर प्लान का हवाला देते हुए इन लोगों के मकान तोड़ने के लिए नोटिस जारी किया है।
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नोटिस में कहा है कि रहवासी तीन दिन में स्वयं मकान तोड़ लें। इस नोटिस को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई। इसमें आशंका व्यक्त की गई है कि उज्जैन निगम द्वारा जारी नोटिस का जवाब तो पेश कर दिया है लेकिन निगम बगैर रहवासियों की बात सुने ही मकान तोड़ने की तैयारी कर रहा है।
हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश जारी किया कि याचिकाकर्ताओं ने जो जवाब और इसके साथ दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं उन पर कानून के दायर में रहकर विचार किया जाए।
याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर अवसर प्रदान किया जाए। जब तक सुनवाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई आदेश पारित न किया जाए और अगर आदेश याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध हो तो भी आदेश जारी होने की तारीख से सात दिन तक उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाए।