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इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में बड़ा खुलासा... मेस के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया, तेल-नमकीन भी असुरक्षित

शिशुकुंज स्कूल के बच्चे स्कूल की मैस में आरओ के जिस पानी को शुद्ध मानकर पी रहे थे, वह दूषित था। उसमें ड्रेनेज में पाए जाने वाले हानिकारक ई-कोलाई व कोल...और पढ़ें

By Udaypratap SinghEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 09:59:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 09:59:30 PM (IST)
इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में बड़ा खुलासा... मेस के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया, तेल-नमकीन भी असुरक्षित
पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शिशुकुंज स्कूल के बच्चे स्कूल की मैस में आरओ के जिस पानी को शुद्ध मानकर पी रहे थे, वह दूषित था। उसमें ड्रेनेज में पाए जाने वाले हानिकारक ई-कोलाई व कोलीफॉर्म बैक्टीरिया थे। यह खुलासा खाद्य एवं औषधि विभाग की जांच में हुआ है। इतना ही नहीं मैस में छात्रों को दी जाने वाली फीकी सेव नमकीन व रिफाइंड सोयाबीन तेल असुरक्षित था।

मेस की तुअर दाल व स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम घटिया क्वालिटी की थी। खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा शिशुकुंज एजुकेशनल सोसायटी को सुधार सूचना पत्र जारी कर 14 दिन में कमियां दूर कर आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


100 से ज्यादा बच्चों के बीमार होने के बाद जागा प्रशासन, दी चेतावनी

गौरतलब है कि स्कूल के झलारिया परिसर की मैस में भोजन करने के बाद 100 से ज्यादा विद्यार्थी बीमार हो गए थे। इसके बाद 22 जून को खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा शिशुकुंज स्कूल की मैस का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों से संबंधित कई गंभीर कमियां पाए जाने पर अब खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के अंतर्गत संस्थान को सुधार सूचना पत्र जारी किया गया है। निर्धारित अवधि में संतोषजनक अनुपालन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार लाइसेंस/पंजीयन के निलंबन सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

मैस में मिले एक्सपायरी खाद्य पदार्थ, एप्रन व ग्लव्स नहीं पहने थे कर्मचारी

खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम के निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल की मैस में खाद्य निर्माण क्षेत्र की खिड़कियां उचित रूप से कवर नहीं थीं, जिससे कीट एवं अन्य पेस्ट के प्रवेश की संभावना बनी हुई थी। भोजन निर्माण के रॉ-मैटेरियल का भंडारण अव्यवस्थित था। मैस में एक्सपायरी खाद्य पदार्थ भी संग्रहित पाए गए, जिससे एफआईएफओ एवं एफईएफओ प्रणाली का पालन नहीं होना स्पष्ट हुआ।

खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी तथा खाद्य निर्माण में प्रयुक्त कुछ बर्तन फूड ग्रेड सामग्री के स्थान पर एल्यूमीनियम के पाए गए। इसके अतिरिक्त उपयोग किया हुआ कुकिंग ऑयल किचन में ही संग्रहित पाया गया।

डीप फ्रीजर में तापमान नियंत्रण प्रणाली एवं तापमान प्रदर्शित करने वाला डिस्प्ले उपलब्ध नहीं था। मैस में खाद्य सामग्री वितरण करने वाले फूड हैंडलर्स केवल कैप का उपयोग करते पाए गए, जबकि एप्रन एवं ग्लव्स का उपयोग नहीं किया जा रहा था। खाद्य निर्माण में प्रयुक्त पानी की नवीनतम एनएबीएल लैब (आईएस:10500) जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी तथा पेस्ट कंट्रोल का रिकॉर्ड भी अपूर्ण पाया गया।

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5 खाद्य नमूनों में मिलीं गंभीर खामियां: देखें जांच रिपोर्ट के मुख्य पॉइंट्स

खाद्य नमूनों में पीने का पानी, सोयाबीन तेल, फीकी नमकीन, तुअर दाल एवं अमूल स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम के नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले। इनमें मिली खामियां इस प्रकार हैं...

  • आरओ पानी (असुरक्षित): ई-कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले।
  • तुअर दाल (अवमानक): दाल के खराब दानों की मात्रा 1.83 प्रतिशत मिली, जो मानक स्तर की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 1 प्रतिशत से अधिक है।
  • फीकी सेव नमकीन (असुरक्षित): दुर्गंधयुक्त/कड़वी मिली। प्रति किग्रा ऑक्सीजन की रीडिंग 21.13 पाई गई, जो मानक स्तर की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 10 से दोगुनी मिली। यह कानूनी सुरक्षा सीमा से 111.3 प्रतिशत अधिक है, जो दर्शाता है कि तेल व वसा अधिक था। ऐसे में यह उत्पाद खाने योग्य नहीं था।
  • रिफाइंड सोयाबीन तेल (असुरक्षित): तेल में लेड की मात्रा 0.15 मिग्रा प्रति किलो मिली, जो अधिकतम स्वीकार्य सुरक्षा सीमा 0.1 मिग्रा प्रति किलो से अधिक है।
  • स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम (अवमानक): मिल्क फैट 9.28 प्रतिशत व टोटल सॉलिड्स 35.22 प्रतिशत मिला। दोनों न्यूनतम सीमा से कम मिले। आइसक्रीम में थक्के व गांठ भी मिलीं।

शिशुकुंज स्कूल 14 दिवस के भीतर अथवा उससे पूर्व सभी कमियों का निराकरण कर देता है, तो जिला प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त दल पुनः संस्थान का निरीक्षण करेगा। निरीक्षण में सभी कमियां दूर होना, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन पाया जाने के बाद ही संबंधित संस्थान को खाद्य कारोबार एवं मेस संचालन की अनुमति प्रदान की जाएगी। अन्यथा नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही भविष्य में नियत समयावधि पर परिसर का खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा नियमित निरीक्षण कराना अनिवार्य होगा। - शिवम वर्मा, कलेक्टर