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Success Story: बस्तियों से निकली अंतरिक्ष मिशन की डोर, बेटियां बना रहीं सैटेलाइट; इंदौर की दर्शना शर्मा का चयन

Success Story: एमपी से 15 बच्चियां शुरुआती चरण में शामिल हुईं, वर्चुअल थ्योरी, इंटरव्यू और रुचि के आधार पर अंतिम चयन में हर देश और भारत के 20 राज्यों ...और पढ़ें

By bharat mandhanyaEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 28 Aug 2026 08:04:33 AM (IST)Updated Date: Fri, 28 Aug 2026 08:08:13 AM (IST)
Success Story: बस्तियों से निकली अंतरिक्ष मिशन की डोर, बेटियां बना रहीं सैटेलाइट; इंदौर की दर्शना शर्मा का चयन
मिशन में शामिल बच्चियां ले रहीं ट्रेनिंग।

HighLights

  1. दर्शना शर्मा का स्पेस किड्ज इंडिया के मिशन शक्ति सैट में चयन
  2. मध्य प्रदेश से एकमात्र, 108 देशों से 12 हजार बच्चियों का चयन हुआ था
  3. बस्ती की बच्चियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने के लिए मिशन शुरू किया

भरत मानधन्या, नईदुनिया, इंदौर। इंदौर शहर की एक गरीब बस्ती में रहने वाली बच्ची दर्शना शर्मा अब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। दर्शना शर्मा मध्यप्रदेश से चयनित होने वाली एकमात्र बच्ची हैं, जिन्हें सैटेलाइट निर्माण और अंतरिक्ष तकनीक की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

चेन्नई स्थित स्पेस किड इंडिया ने बस्ती क्षेत्रों में रहने वाली बच्चियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने और उन्हें इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पिछले वर्ष मिशन शुरू किया था। इसके मिशन के अंतर्गत भारत सहित 108 देशों से लगभग 12 हजार बच्चियों का चयन किया गया। मध्यप्रदेश से 15 बच्चियां शुरुआती चरण में शामिल हुईं।


सभी प्रतिभागियों को वर्चुअल माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान की सैद्धांतिक शिक्षा दी गई। इसके बाद इंटरव्यू, विज्ञान की बुनियादी जानकारी और विषय के प्रति रुचि के आधार पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस प्रक्रिया के अंतिम चरण में प्रत्येक देश से एक बच्ची का चयन किया गया। भारत के 20 राज्यों से भी एक-एक बच्ची चुनी गई। इसी क्रम में मध्यप्रदेश से दर्शना शर्मा का चयन हुआ।

दिल्ली की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में विशेष प्रशिक्षण

मिशन शक्ति सैट के दूसरे चरण के अंतर्गत दिल्ली की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर चयनित बच्चियों का विशेष प्रशिक्षण शुरू किया गया है। 23 अगस्त से शुरू हुई यह ट्रेनिंग 30 अगस्त तक चलेगी। इसरो और विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बच्चियां एक सैटेलाइट परियोजना पर काम कर रही हैं।

उन्हें पेलोड तैयार करने, सैटेलाइट के काम करने की प्रक्रिया, उसकी कक्षा यानी आर्बिट, अंतरिक्ष से डाटा प्राप्त करने और अंतरिक्ष तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग की जानकारी दी जा रही है। कृषि जैसे क्षेत्रों में सैटेलाइट तकनीक की भूमिका को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।

120 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई थी

मिशन की इंडियन एंबेसडर और रिटायर्ड विंग कमांडर जया तारे के अनुसार, चयनित छात्राओं को पहले ही 120 घंटे की आनलाइन ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अब उन्हें हैंड्स-आन ट्रेनिंग के माध्यम से सैटेलाइट में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, सामग्री और तकनीक की जानकारी दी जा रही है।

अलग-अलग देशों से आए वैज्ञानिक बच्चियों को सैटेलाइट निर्माण की बारीकियां समझा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए जा रहे पेलोड को सैटेलाइट में शामिल किया जाएगा। इसके बाद वैज्ञानिकों की देखरेख में सैटेलाइट की अंतिम असेंबली पूरी की जाएगी। इसे 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर लांच करने की योजना है।

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