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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्वामित्व योजना के तहत नि:शुल्क रजिस्ट्री का काम पटवारियों के विरोध के कारण रुका हुआ था, जो अब आखिरकार शुरू होने जा रहा है। इंदौर जिले में कुल 1.34 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री की जानी है। हाल ही में पटवारी संघ की शासन के साथ हुई बैठक में मांगों पर सहमति बन गई है, जिसके बाद योजना के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सोमवार से इंदौर जिले के 554 गांवों में स्थित आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री का कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश में पीढ़ियों से अपने मकान और आबादी भूमि पर रह रहे ग्रामीण परिवारों को अब मालिकाना हक का पक्का कानूनी दस्तावेज मिलने जा रहा है। राज्य में 'स्वामित्व योजना' के तहत लगभग 50 लाख निजी संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ इंदौर से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी मौजूदगी में 17 सितंबर को किया गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से रह रहे परिवारों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार प्रदान करना है।
ग्रामीण इलाकों में आबादी भूमि पर बसे परिवारों के पास अक्सर अपनी संपत्ति का कोई रजिस्टर्ड कानूनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में 'स्वामित्व योजना' की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत गांवों की आबादी भूमि का अत्याधुनिक ड्रोन सर्वे करवाकर 'अधिकार अभिलेख' (प्रॉपर्टी कार्ड) तैयार किए गए। मध्य प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 48.32 लाख रिकॉर्ड आम नागरिकों की निजी संपत्तियों से सीधे तौर पर संबंधित हैं।
अक्सर लोग प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। प्रॉपर्टी कार्ड केवल यह प्रमाणित करता है कि शासकीय सर्वे में संबंधित व्यक्ति का नाम दर्ज है। इसके ठीक विपरीत, रजिस्ट्री एक पंजीकृत कानूनी दस्तावेज (Registered Conveyance Deed) होती है, जो व्यक्ति के मालिकाना हक को पूर्णतः कानूनी रूप से पक्का और सुरक्षित बनाती है।
योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की स्टांप ड्यूटी या पंजीयन शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा; पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया का समस्त खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। नागरिकों को किसी रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर ही विशेष शिविर आयोजित कर डीड तैयार की जाएगी। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनका नाम पूर्व आयोजित 'स्वामित्व योजना' के सर्वे में स्वीकृत हो चुका है। फिलहाल कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है, केवल तैयार रिकॉर्ड्स को रजिस्ट्री का रूप दिया जा रहा है। हितग्राहियों को पक्की रजिस्ट्री के साथ इसकी डिजिटल कॉपी भी दी जाएगी।
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