
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : डायरेक्टोरेट आफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने फिर से सिंथेटिक ड्रग की बड़ी खेप पकड़ी है। कर्नाटक के तीन तस्कर खेप लेकर उज्जैन-देवास टोल से गुजर रहे थे। डीआरआई की टीम ने रोकने की कोशिश की तो टोल का बैरियर तोड़कर भाग गए।
डीआरआई के अधिकारियों ने उनका डेढ़ घंटे तक पीछा किया। इंदौर बिचौली मर्दाना पर थार गाड़ी के साथ तीनों तस्कर पकड़ाए। तलाशी में थार गाड़ी में लगी स्टेपनी (स्पेयर व्हील) में सिंथेटिक ड्रग एम्फेटामाइन मिली।
तस्करी कर ड्रग ले जाने वालों में युवती रुकसार उन्नीसा व दो युवक मुकहीत पाशा और मोहम्मद इमरान शामिल हैं।
तीनों तस्कर नार्थ बैंगलुरू के रहने वाले हैं। कर्नाटक में रिजस्टर्ड थार गाड़ी (केए 03,एनजेड 24247) से ये उज्जैन-देवास टोल प्लाजा ग्राम बागड़ से गुजर रहे थे। इंटेलीजेंस इनपुट के आधार पर डीआरआइ और सेंट्रल ब्यूरो आफ नारकोटिक्स (सीबीएन) की टीम बुधवार तड़के से वहां पर निगरानी कर रही थी।
इसी दौरान संदिग्ध काली कार उन्हें आती दिखी। इसे रोकने की कोशिश हुई और फिल्मी स्टाइल पीछा करने के बाद तस्कर पकड़े गए। डीआरआइ ने पहले इन्हें हिरासत में लिया। गहन जांच के बाद स्टेपनी वाले टायर के भीतर से ड्रग्स के 21 पैकेट मिले। इन पैकेट में सफेद-पीला क्रिस्टल जैसा पदार्थ मिला।
जांच करने पर उसके सिंथेटिक नशीली ड्रग एम्फेटामाइन होने की पुष्टी हुई। जांच और पूछताछ के बाद गुरुवार को तीनों आरोपितों को डीआरआइ ने गिरफ्तार कर लिया। 21 पैकेट में कुल 7.116 किलो एम्फेटामाइन बरामद हुई है। तस्करी में इस्तेमाल हुई महिंद्रा थार गाड़ी को भी सीज कर लिया गया है। एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तारी के बाद तीनों तस्करों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 15 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग एम्फेटामाइन की प्रदेश में तस्करी और बरामदगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक माह में ही राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) चार मामलों में ड्रग बरामद कर चुका है। इंदौर में एक माह में यह तीसरा मामला सामने आया है। तस्करी के तार नाइजीरियन तस्करों से जुड़ रहे हैं। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार ताजा तस्करी के तार भी नोएडा से जुड़ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि वहां कई छोटी-छोटी लैब बनाकर इस ड्रग का उत्पादन हो रहा है। जिसे बड़े शहरों के क्लबों में युवाओं को बेचकर उन्हें नशे का शिकार बनाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार एक छोटे कमरे जितनी जगह में कुछ प्रतिबंधित रसायनों से इस ड्रग को बनाना संभव है इसलिए इसका चलन बढ़ रहा है। डीआरआइ अब नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और बीते दिनों एक टीम ने अफ्रीका के देश में भी कार्रवाई की है।