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इंदौर में लंबे समय से अधूरा पड़ा है एमआर-5 का काम, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर

MR 5 Indore: इंदौर में एमआर-5 पितृ पर्वत के पास से शुरू होकर सुपर कॉरिडोर होते हुए इंदौर वायर फैक्ट्री तक प्रस्तावित है। कई हिस्सों में तो अब तक काम ह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 05 Sep 2026 09:37:25 AM (IST)Updated Date: Sat, 05 Sep 2026 09:51:20 AM (IST)
इंदौर में लंबे समय से अधूरा पड़ा है एमआर-5 का काम, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ। - फाइल फोटो

HighLights

  1. कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जाए
  2. निगम और आईडीए को दो माह में तय करना था कि सड़क निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण कौन
  3. अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एमआर-5 के आधे अधूरे निर्माण को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत हुई है। हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जाए।

एमआर-5 पितृ पर्वत के पास से शुरू होकर सुपर कॉरिडोर होते हुए इंदौर वायर फैक्ट्री तक प्रस्तावित है। सालों से इसका काम अधूरा पड़ा है। कई हिस्सों में तो अब तक काम ही शुरू नहीं हुआ है। एमआर-5 का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने पर पूर्व में हाई कोर्ट में एक याचिका पेश हुई थी।


इसमें छोटा बांगड़दा रोड (एमआर-5) का निर्माण मास्टर प्लान के अनुसार शीघ्र पूरा कराने, अवैध और बिना लाइसेंस संचालित स्लाटर हाउस के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और यातायात सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की गई थी।

आईडीए और नगर निगम के बीच विवाद

सुनवाई में हाई कोर्ट ने माना था कि सड़क के बड़े हिस्से का निर्माण होना बाकी है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अधिकारी बगैर किसी कारण के सड़क निर्माण पूरा नहीं कर रहे हैं। इधर शासन का कहना था कि नगर निगम और आईडीए के बीच विवाद है। उक्त दोनों को ही इस संबंध में निर्णय लेना है। कोर्ट ने इस याचिका का यह कहते हुए निराकरण कर दिया था कि सड़क निर्माण को लेकर याचिकाकर्ता नगर निगम और आईडीए को आवेदन दे।

निगम और आईडीए को दो माह में तय करना था कि सड़क निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण कौन है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सक्षम प्राधिकरण तय होने के तुरंत बाद सड़क का काम शुरू कर दिया जाए। अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद निगमायुक्त व आइडीए सीईओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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