
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरगी बांध का घटता जलस्तर इस बार सिर्फ जल संकट की तस्वीर नहीं दिखा रहा, बल्कि चार दशक पुरानी एक भूली-बिसरी कहानी भी सामने ले आया है। बैकवाटर क्षेत्र में पानी कम होने के बाद लोहे की एक मोटर बोट दिखाई देने लगी है, जो सालों से जलराशि के भीतर दबी हुई थी। नाव के सामने आने की खबर फैलते ही इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया है। कई लोग इसे अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से साझा की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मोटर बोट बरगी परियोजना के शुरुआती दौर की है। उस समय बांध निर्माण और डूब प्रभावित गांवों के लोगों के आवागमन के लिए ऐसी नावों का उपयोग किया जाता था। बताया जाता है कि वर्ष 1986 के आसपास तकनीकी खराबी या दुर्घटना के कारण यह नाव बैकवाटर में डूब गई थी। उस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है, लेकिन नाव को दोबारा बाहर नहीं निकाला जा सका और समय के साथ यह पानी के भीतर ही इतिहास बन गई।
VIDEO | Jabalpur, Madhya Pradesh: Submerged boats, temple ruins surface at Bargi Dam reservoir amid falling water level.#JabalpurNews #BargiDam
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— Press Trust of India (@PTI_News) July 2, 2026
अब जब जलस्तर काफी नीचे पहुंचा है तो नाव का अधिकांश हिस्सा सतह पर दिखाई देने लगा है। लोहे से बनी इस मोटर बोट पर वर्षों तक पानी में रहने के कारण मोटी जंग की परत चढ़ चुकी है, लेकिन उसका ढांचा आज भी पहचान में आता है।
नाव पर लिखा सुमा रेप्स प्रोजेक्ट जबलपुर भी अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिससे उसके बरगी परियोजना से जुड़े होने के संकेत मिलते हैं। बरगी बांध में इस तरह का दृश्य पहले कभी देखने को नहीं मिला। यही वजह है कि यह पुरानी नाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
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पर्यटक इसे बरगी परियोजना के इतिहास की एक अनमोल निशानी मान रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि घटता जलस्तर भविष्य के लिए जल संरक्षण की गंभीर चुनौती की ओर भी संकेत देता है। चार दशक तक पानी में दबी रही यह मोटर बोट आज केवल एक जंग लगी संरचना नहीं, बल्कि बरगी परियोजना के शुरुआती दिनों और उस दौर के संघर्षों की मूक गवाह बनकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।