
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) जबलपुर शाखा ने अपने भवन के जीर्णोद्धार में ऐसा प्रयोग किया है, जो सुंदरता, आध्यात्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण, तीनों का संदेश देता है।
राइट टाउन स्थित आइएमए हाउस में प्रवेश करते ही अब सीढ़ीदार जल झरना लोगों का स्वागत करेगा। यह झरना केवल भवन की सुंदरता और शांत वातावरण का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जन के लिए भी उपयोग में लाया जाएगा।
इससे न केवल प्राकृतिक जल स्रोतों में प्रतिमा विसर्जन की आवश्यकता कम होगी, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल होगी।
छह माह से कम समय में भवन के पहले चरण का जीर्णोद्धार पूरा कर इसे नया स्वरूप दिया गया है।
जीर्णोद्धार कार्य के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि एवं आइएमए बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. पवन स्थापक ने कहा कि चिकित्सक केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं रहते हैं।
अपनी संस्था और समाज के प्रति भी समान जिम्मेदारी निभाते हैं। इतने कम समय में भवन का उत्कृष्ट कायाकल्प हुआ है। जो कार्य शेष हैं, उन्हें भी जल्द पूरा करने का लक्ष्य है और उसमें उनका हरसंभव सहयोग रहेगा। उन्होंने पूरी टीम को बधाई दी।
आइएमए हाउस के भूतल पर बनाया गया सीढ़ीदार जल झरना इस जीर्णोद्धार का सबसे आकर्षक हिस्सा है। भवन में प्रवेश करते ही बहते पानी की मधुर ध्वनि और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव होगा।
जलकुंड अब गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए भी उपयोग किया जाएगा। इससे प्रतिमाओं का विसर्जन नियंत्रित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से होगा।
संस्था का मानना है कि यह पहल अन्य सामाजिक संगठनों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है। आइएमए हाउस में वर्ष 2025 से गणेशोत्सव मनाने की शुरुआत हुई थी।
पिछले वर्ष अस्थायी कुंड में प्रतिमा विसर्जन किया गया था, जबकि इस बार नव निर्मित सीढ़ीदार जल झरने के कुंड में ही गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। इससे धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा।
जीर्णोद्धार के पहले चरण में जर्जर छत पर नया टैरेस शेड लगाया गया। पूरी छत की मरम्मत कर वाटरप्रूफिंग की गई। भवन के प्रवेश द्वार पर सीढ़ीदार जल झरना तैयार किया गया तथा भवन की देखरेख करने वाले गार्ड एवं उसके परिवार के लिए नया कक्ष भी बनाया गया।
दूसरे चरण में भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सोलर सिस्टम लगाया जाएगा। इससे वर्षा जल का संरक्षण होगा और भवन की ऊर्जा जरूरतों को भी पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
आइएमए हाउस का यह कायाकल्प लगभग आठ लाख रुपये की लागत से छह माह से कम समय में पूरा हुआ। संस्था के 1,351 चिकित्सक सदस्यों से 10-10 हजार रुपये सहयोग राशि का आह्वान किया गया था। कई चिकित्सकों ने स्वेच्छा से इससे अधिक राशि देकर भी योगदान दिया।
लगभग 20 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने आइएमए हाउस की नींव वर्ष 1967 में रखी गई थी और 1970 में भवन का संचालन शुरू हुआ। वर्ष 2019 में भवन को नया स्वरूप मिला था।
अब 56 वर्ष पुराने इस प्रतिष्ठित भवन के जीर्णोद्धार ने इसे एक बार फिर आधुनिक और पर्यावरण हितैषी पहचान दिलाई।
यह भी पढ़ें- जबलपुर का ग्रामीण अंचल अब फिल्म और डिजिटल प्रोडक्शन का नया केंद्र, शूटिंग देखने पहुंच रहे लोग