

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नर्मदा नदी एवं बरगी जलाशय के तटवर्ती क्षेत्रों से लेकर पेंच टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान तक पक्षियों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने ट्रांसमिशन लाइनों पर विशेष उपकरण लगाने का काम शुरू किया है।
एमपी ट्रांसको ने नदियों, जलाशयों, वेटलैंड, वन क्षेत्रों और प्रवासी पक्षियों के प्रमुख उड़ान मार्गों से गुजरने वाले ट्रांसमिशन कॉरिडोरों को इस कार्य के लिए प्राथमिकता दी है। जबलपुर में नर्मदा नदी और बरगी जलाशय, मंडला के वन क्षेत्र, पेंच टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ऐसे क्षेत्र हैं जहां बड़ी संख्या में स्थायी और प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इन क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास पक्षियों की गतिविधियां अधिक रहती हैं।
बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर उच्च दृश्यता वाले उपकरण होते हैं, जिन्हें ट्रांसमिशन लाइन के अर्थ वायर या शील्ड वायर पर लगाया जाता है। इनकी मदद से उड़ते हुए पक्षियों को दूर से ही लाइन की मौजूदगी का पता चल जाता है और उनके तार से टकराने की संभावना कम होती है। वहीं बर्ड गार्ड और बर्ड प्रिवेंटर को टावर, इंसुलेटर स्ट्रिंग और अन्य संवेदनशील विद्युत संरचनाओं पर लगाया जाता है। इनका उद्देश्य पक्षियों को विद्युत उपकरणों के सीधे संपर्क में आने से रोकना है।
जलाशयों और नदियों के आसपास बड़ी संख्या में पक्षी ट्रांसमिशन टावरों और अन्य संरचनाओं पर बैठते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इंसुलेटर पर पक्षियों की बीट जमा होने से वर्षा या अधिक नमी की स्थिति में विद्युत चालकता बढ़ सकती है। इससे फ्लैशओवर, लीकेज करंट, अर्थ फॉल्ट और लाइन ट्रिपिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बड़े पक्षियों के कारण होने वाले फॉल्ट कई बार ट्रांसमिशन लाइन की अनियोजित ट्रिपिंग और बिजली आपूर्ति में व्यवधान का कारण बनते हैं। ऐसे में बर्ड गार्ड और बर्ड प्रिवेंटर पक्षियों को संवेदनशील विद्युत संरचनाओं से दूर रखने में मदद करते हैं।
एमपी ट्रांसको के प्रारंभिक आकलन के अनुसार जिन ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों पर ये उपकरण लगाए गए हैं, वहां पक्षीजनित व्यवधान और ब्रेकडाउन की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। इससे ट्रांसमिशन लाइनों की उपलब्धता और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने कहा कि कंपनी विद्युत पारेषण प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए भी प्रतिबद्ध है। पक्षी सुरक्षा उपकरणों की स्थापना से पक्षियों की सुरक्षा के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क की परिचालन दक्षता और स्थिरता में भी सुधार हो रहा है।
कंपनी आगामी चरण में नर्मदा तटवर्ती क्षेत्रों, प्रमुख जलाशयों, वन क्षेत्रों और अन्य पक्षी संवेदनशील ट्रांसमिशन कॉरिडोरों से गुजरने वाली 132 केवी, 220 केवी और 400 केवी लाइनों पर भी इन उपकरणों की स्थापना करेगी। इससे जैव विविधता संरक्षण और विश्वसनीय विद्युत पारेषण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में प्रयास और मजबूत होंगे।