आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा के साथी शरद जायसवाल की जमानत अर्जी निरस्त, हाई कोर्ट से दूसरी बार नहीं मिली राहत
इससे पहले 29 जुलाई 2025 को हाई कोर्ट से उसकी जमानत निरस्त हुई थी। लोकायुक्त की 19 दिसंबर, 2024 को की गई छापेमारी में सौरभ शर्मा के घर से 1.14 करोड़ रु ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 31 Mar 2026 08:14:53 PM (IST)Updated Date: Tue, 31 Mar 2026 08:17:43 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का आदेश।HighLights
- रिहा होने पर दोबारा अपराध करने की आशंका रहेगी।
- ऐसे में आरोपी को इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती।
- आवेदक ने कहा कि कथित अपराध की जानकारी नहीं थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पीके अग्रवाल की एकलपीठ ने मनी लान्ड्रिंग मामले में परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के साथी शरद जायसवाल की दूसरी बार जमानत अर्जी निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला संगठित आर्थिक अपराध से जुड़ा है।
इसमें कई स्तर पर अवैध लेन-देन और नेटवर्क शामिल हैं। आरोपित के विरुद्ध प्रथमदृष्ट्या पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। रिहा होने पर दोबारा अपराध करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आरोपी को इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि उसे इस कथित अपराध की जानकारी नहीं थी।
शरद का मामला परिवहन विभाग के पूर्व कान्स्टेबल सौरभ शर्मा से जुड़ा है। आरोप है कि सौरभ ने अवैध रूप से संपत्ति अपने स्वजनों और करीबी सहयोगियों के नाम पर खड़ी की, जिसमें वर्तमान आरोपी शरद जायसवाल भी शामिल हैं। शरद जायसवाल को 10 फरवरी, 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले 29 जुलाई 2025 को हाई कोर्ट से उसकी जमानत निरस्त हुई थी। लोकायुक्त की 19 दिसंबर, 2024 को की गई छापेमारी में सौरभ शर्मा के घर से 1.14 करोड़ रुपये नकद, सोने के जेवरात सहित कुल 3.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।
वहीं सह-आरोपी चेतन सिंह गौर के यहां से भी करीब 1.68 करोड़ रुपये नकद और 2.11 करोड़ रुपये की चांदी बरामद हुई। लोकायुक्त में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री हुई।
ईडी के अनुसार यह पूरा मामला अपराध की आय को छिपाने और वैध दिखाने का है, जो मनी लान्ड्रिंग की श्रेणी में आता है। जांच में यह बात सामने आई थी अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के जरिए कथित काले धन को वैध बनाने की साजिश रची गई।