
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर जिले के बरगी बांध में गुरुवार शाम हुआ क्रूज हादसा एक दर्दनाक त्रासदी में बदल गया, जिसने खुशी के पलों को मातम में बदल दिया। सैर-सपाटे के लिए निकले पर्यटकों को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में उनकी जिंदगी संकट में पड़ जाएगी।
तेज आंधी और खराब मौसम के चलते पर्यटकों से भरा क्रूज असंतुलित होकर डूब गया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अब भी लापता हैं। गुरुवार को 4 बॉडी मेडिकल अस्पताल लाई गईं थीं, आज पांच बॉडी लाई गई हैं। हादसे ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं। पर्यटन विभाग की लापरवाही भी उजागर कर दी है।
क्रूज को सफलतापूर्वक किनारे तक लाया जा चुका है। अब उसे क्रेन की सहायता से बाहर निकालने का प्रयास जारी है। घटनास्थल पर एसीएस संजय दुबे, डॉ. इलैयाराजा, संभागायुक्त धनंजय सिंह, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, एसपी श्री संपत उपाध्याय सहित सभी संबंधित अधिकारी और राहत एवं बचाव दल पूरी तत्परता के साथ मौजूद हैं।



घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई। स्थानीय गोताखोरों और मल्लाहों ने भी बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि अंधेरा और खराब मौसम रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी बाधा बना। टॉर्च की रोशनी में सर्च अभियान चलाना पड़ा। देर रात सेना की टीम भी मौके पर पहुंची और राहत कार्य में शामिल हुई।

इस हादसे में सिविल लाइन निवासी रियाज हुसैन की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। वह तीन घंटे तक पानी में फंसे रहे, जहां उनकी गर्दन पानी के ऊपर और शरीर नीचे था। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी, समधन और नाती उनकी आंखों के सामने लापता हो गए। चारों ओर शव तैरते दिख रहे थे, लेकिन समय रहते रेस्क्यू टीम ने उन्हें बचा लिया।
इस हादसे ने पर्यटन विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। मौसम खराब होने के संकेत पहले से थे। उसके बाद भी भी क्रूज चलाया गया। सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाना सुनिश्चित नहीं किया गया, जबकि क्रूज पर लाइफ जैकेट रखी गई थीं। आपात स्थिति में तुरंत रेस्क्यू के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
विशेषज्ञों के अनुसार इस हादसे के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं: