जबलपुर क्रूज हादसा: 3 घंटे पानी में फंसे रहे रियाज, बोले- गर्दन बाहर थी, इसलिए सांस आती रही; परिवार की तलाश जारी
बरगी बांध क्रूज हादसे में रियाज हुसैन चमत्कारिक रूप से बच गए, तीन घंटे पानी में फंसे रहे। पत्नी, समधन और नाती लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 01 May 2026 08:48:36 AM (IST)Updated Date: Fri, 01 May 2026 02:38:02 PM (IST)
बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे से जुड़ी हैरान करने वाली खबर। (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- बरगी बांध क्रूज हादसे में रियाज हुसैन जिंदा बच निकले
- तेज आंधी से क्रूज का संतुलन बिगड़ा और वह डूबा
- तीन घंटे तक पानी में फंसे रहे, फिर बचाव हुआ
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे से जुड़ी एक हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। सिविल लाइन निवासी रियाज हुसैन मौत के मुंह से लौटकर आए हैं, जबकि उनकी पत्नी, समधन और नाती अब भी लापता हैं।
शाम को परिवार के साथ सामान्य सैर अचानक तूफान में तब्दील हो गई, जब तेज आंधी से क्रूज का संतुलन बिगड़ गया और वह डूबने लगा। चारों ओर चीख-पुकार के बीच रियाज तीन घंटे तक पानी में फंसे रहे, जहां उनकी गर्दन बाहर और शरीर पानी में था। राहत दल की नजर पड़ने पर उनकी जान बच सकी, जबकि परिवार की तलाश जारी है।
सैयद ने बताया कि बरगी बांध में शाम को हम जब क्रूज पर सवार हुए थे, तब सब कुछ सामान्य था। मैं अपनी पत्नी, समधन और उनके नाती के साथ क्रूज की सवारी का आनंद ले रहा था। शुरुआत में सब ठीक था। फिर करीब सवा छह बजे अचानक मौसम का खराब हो गया। तेज आंधी चली। उस वक्त क्रूज लौट रहा था। अंधड़ से क्रूज का संतुलन बिगड़ गया, लहरें ऊपर उठीं और देखते-देखते क्रूज में पानी भर गया। वह डूबने लगा। हर कोई पानी में डूबने लगा।
पत्नी, समधन और उनका नाती पलक झपकते ही आंखों से ओझल हो गए। मैं तो खुद को भी नहीं संभाल पा रहा था। चारों तरफ चीख-पुकार और तेज अंधड़ का शोर था। डूबता क्रूज और मदद की गुहार लगाते लोग थे।
चमत्कार हो गया
- रियाज ने बताया कि उसे खुद भी बचने की उम्मीद कम थी। मगर उसके बाद जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। पानी में डूबते हुए मुझे याद भी नहीं कि मैं कब बांध की एक ऐसी जगह पहुंच गया, जहां मेरी गर्दन कुछ इस तरह से फंस गई कि गर्दन पानी के बाहर और पूरा शरीर पानी के अंदर था, मुझे सांस आती रही। करीब तीन घंटे मैं वहां फंसा रहा।
- बांध के पानी में लोगों के शव नजर आ रहे थे। गनीमत यह रही कि मेरी सांसों की डोर टूटने से पहले ही बचाव दलों की नजर मुझ पर पड़ गई और मैं बचा लिया गया, मगर पत्नी, समधन और नाती अभी भी लापता हैं, उनकी तलाश की जा रही है। सैयद परिवार के साथ क्रूज की सवारी का आनंद लेने गए थे। वे तो बच गए, मगर उनके स्वजन अभी भी लापता हैं।