
नईदुनिया प्रतिनधि, जबलपुर। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के अंतर्गत कलेक्टर न्यायालय में दायर अपील के दो अलग-अलग प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश पारित किए हैं। एक प्रकरण में भाजपा पार्षद रेनू कोरी को 87 वर्षीय ससुर का मकान एक माह में खाली करने और दूसरे प्रकरण में बुजुर्ग पिता की संपत्ति पर कब्जा करने वाले बेटे को बेदखल करने का फैसला सुनाया है।
प्रकरण के बारे में प्राप्त जानकारी के अनुसार गोहलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत डा राममनोहर लोहिया वार्ड क्र. 2 त्रिमूर्ति नगर निवासी 87 वर्षीय रूपलाल कोरी टेलीग्राफ फैक्ट्री से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी बचत से वर्ष 1986 में 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था।
उनके पांच पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। रूपलाल कोरी ने कलेक्टर न्यायालय में दायर अपील में बताया था कि उनके दिवंगत पुत्र राकेश कोरी की पत्नी रेनू कोरी ने मकान के कमरों व दुकान पर कब्जा कर रखा है। मकान पुराना व जर्जर होने के कारण जब उन्होंने मरम्मत का प्रयास किया, तो उसमें बाधा उत्पन्न की गई। इसके चलते वयोवृद्ध अवस्था में उन्हें मानसिक व व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
बुजुर्ग रूपलाल कोरी ने पहले अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) अधारताल के समक्ष बेदखली हेतु आवेदन किया था। एसडीएम न्यायालय ने 15 मई 2026 को इसे संपत्ति व बंटवारे का पारिवारिक विवाद बताते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था और सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी थी। इस आदेश के खिलाफ अपीलार्थी ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां से समयबद्ध अपील निराकरण के निर्देश के बाद कलेक्टर न्यायालय में अपील दायर की गई।
प्रकरण में विस्तृत सुनवाई के बाद कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने एसडीएम अधारताल के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया। उन्होंने पाया कि अनावेदिका के पास अन्य वैकल्पिक आवास भी उपलब्ध है। आदेश में कहा गया कि जीवन के अंतिम पड़ाव में वयोवृद्ध माता-पिता को अपनी ही स्वअर्जित संपत्ति में शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने का पूर्ण वैधानिक अधिकार है।
वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान व संपत्ति संरक्षण को सर्वोपरि मानते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अनावेदिका रेनू कोरी आदेश प्राप्ति के एक माह के भीतर अपने परिवार और सामान सहित इस मकान से कब्जा समाप्त करें। एक माह का समय बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिया।
इस अवधि के दौरान अपीलार्थी के सम्मान, सुरक्षा या संपत्ति को प्रभावित करने वाला कोई कृत्य नहीं किया जाएगा। कलेक्टर ने आदेश में तहसीलदार अधारताल और थाना प्रभारी गोहलपुर को समय-सीमा के भीतर इसका विधिवत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
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