• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला, केंद्र और राज्यों को नोटिस, शीर्ष अदालत ने जताई चिंता

बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। संबंधित पक्षों को नोटिस जारी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 10:21:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 10:21:04 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला, केंद्र और राज्यों को नोटिस, शीर्ष अदालत ने जताई चिंता
बैगा बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

HighLights

  1. बैगा बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
  2. सुप्रीम कोर्ट CJI पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
  3. स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और पेयजल की बदहाली पर सख्त

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बच्चों की मौत, कुपोषण और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची व न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए बच्चों की मौत पर चिंता जताई। याचिका बालाघाट निवासी अजब लाल लिल्हारे ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा।

स्वास्थ्य सुविधाओं में कमियों पर जताई चिंता

याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल दूरस्थ क्षेत्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं, समय पर टीकाकरण, पौष्टिक आहार और बीमारी की समय रहते पहचान व उपचार की व्यवस्था में गंभीर कमियां हैं।

याचिकाकर्ता ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, बच्चों को सुरक्षित पेयजल और पोषण उपलब्ध कराने तथा मौतों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है। याचिका में मध्य प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में भी बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है।


यह भी पढ़ें- इंदौर व भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए खुशखबरी, 11 अक्टूबर से किराए पर मिलेगी 25% अतिरिक्त छूट

मौतों के आंकड़ों में अंतर और प्रशासनिक दावे

बालाघाट के बिरसा क्षेत्र के गांवों और मंझरे टोलों में बच्चों की मौतों को लेकर आंकड़ों में अंतर सामने आया है। कांग्रेस का दावा है कि करीब चार माह में 45 बच्चों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन ने अब तक 32 मौतों को स्वीकार किया है। एक अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रभावित गांव जगला का दौरा किया था।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ बच्चों की मौत प्रशासनिक आंकड़ों में दर्ज नहीं की गई है। बता दें कि मामला हाई कोर्ट में भी लंबित है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के 57 गांवों में 49,553 लोगों की स्क्रीनिंग का दावा किया है।