मध्य प्रदेश में एसईसीएल के असिस्टेंट मैनेजर के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट पेश
ईडी की जांच में पता चला कि एक मार्च 2008 से 30 नवंबर 2022 की जांच अवधि के दौरान प्रभाकर शुक्ला ने लगभग 83.24 लाख रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 28 Mar 2026 08:08:22 AM (IST)Updated Date: Sat, 28 Mar 2026 08:15:34 AM (IST)
सीबीआई ने भी मामले में विशेष न्यायाधीश जबलपुर के समक्ष चार्जशीट दायर की है। - प्रतीकात्मक तस्वीरHighLights
- प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के प्रविधानों के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच हुई थी
- एफआईआर, उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज की गई थी
- परिवार के सदस्यों के खातों का इस्तेमाल पैसों के असली स्रोत को छिपाने के लिए किया गया था
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रविधानों के तहत, प्रभाकर शुक्ला असिस्टेंट मैनेजर (सर्वे) साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), कोरबा, छत्तीसगढ़ के मामले में लगभग 83.24 लाख रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
ईडी ने सीबीआई, एसीबी, जबलपुर द्वारा प्रभाकर शुक्ला के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के प्रविधानों के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। यह एफआईआर, उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज की गई थी। इसके बाद सीबीआई ने भी इस मामले में विशेष न्यायाधीश जबलपुर के समक्ष चार्जशीट दायर की है।
रिश्तेदारों के नाम अकाउंट खुलवाकर रुपये डाले
ईडी की जांच में पता चला कि एक मार्च 2008 से 30 नवंबर 2022 की जांच अवधि के दौरान प्रभाकर शुक्ला ने लगभग 83.24 लाख रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की थी। जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों का लगभग 39.83 प्रतिशत है।
सार्वजनिक पद पर रहते हुए अवैध रूप से अर्जित की गई ये अपराध से प्राप्त आय, नकद जमा के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में डालकर और आरोपित तथा उसके परिवार के सदस्यों, जिसमें उसकी पत्नी और बेटियां शामिल हैं के नाम पर खोले गए कई खातों के जरिए घुमाकर वैध बनाने की कोशिश की गई।
आय के असली स्त्रोत को छिपाने की कोशिश की
इन पैसों को आगे एफडीआर, वित्तीय निवेश, बीमा पॉलिसियों और जमीन के टुकड़ों सहित चल और अचल संपत्तियों की खरीद के ज़रिए और भी ज़्यादा घुमाया गया और वैध संपत्तियों में मिला दिया गया। जांच में यह भी पता चला कि परिवार के उन सदस्यों के खातों का इस्तेमाल पैसों के असली स्रोत को छिपाने के लिए किया गया, जिनकी अपनी कोई स्वतंत्र आय नहीं थी और आरोपित अपनी आय के स्रोतों को साबित करने में असफल रहा। आगे की जांच अभी जारी है।
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