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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: शहर में इन दिनों छोटे गैस सिलिंडर (पांच किलोग्राम) की किल्लत (Gas Cylinder Shortage) ने भविष्य बनाने के लिए शहर आए छात्रों की मुश्किल बढ़ा दी है। खासकर लाज और किराए के कमरों में रहकर पढ़ाई करने वाले बाहरी विद्यार्थियों के पास भोजन बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण विकल्प है, जो अब गैस की किल्लत (LPG Crisis) की वजह से नहीं मिल पा रहा है। वे छात्र भी परेशान हैं, जो अभी तक मेस से भोजन मंगवाते या वहां जाकर खाते थे।
अब यह सुविधा भी लगभग बंद हो गई है। 15 दिनों में अधिकांश छात्र शहर छोड़कर अपने घर लौट गए हैं। अब छोटे सिलिंडर रिफिल भी नहीं हो रहे हैं। जबलपुर के निजी इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ाई कर रहे मंडला निवासी विजय मेश्राम बताते हैं कि पांच किलो वाला गैस-चूल्हा खरीदकर यहां लाए थे। बाजार में रिफिलिंग ही नहीं हो रही है। मेस में भी खाना मिलना बंद है। ऐसे में अब घर लौटने का ही विकल्प बचा है।
सामान्य दिनों में 400-500 रुपये में रिफिल हो जाती थी, वहीं अब ज्यादा कीमत देने पर भी उपलब्धता नहीं है। विपरीत परिस्थिति के कारण तमाम विद्यार्थियों ने तो होटल और ढाबे में खाना-खाना शुरू कर दिया है, लेकिन वो महंगा पढ़ रहा है। पहले हर दिन 50 से 100 रुपये भोजन पर खर्च होते थे, अब 200 से 300 रुपये खर्च करना पड़ रहा है।
मेस चलाने वाले दीपक कुमार बताते हैं कि लाज संचालकों का कहना है कि छोटे सिलिंडर के अभाव में छात्रों का भोजन खर्च बढ़ गया है और उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। गैस की किल्लत का असर शहर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर भी पड़ा है। कई छात्र परीक्षा तक रुकने के बाद अब कमरों को खाली कर अपने घर लौटने लगे हैं। लाज संचालक बताते हैं कि शहर में यहां आकर पढ़ाई करने वाले अधिकांश छात्र ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं ।
-कोई भी व्यक्ति पांच किलो वाला सिलिंडर ले सकता है
-इसके लिए स्थायी गैस कनेक्शन होना जरूरी नहीं है
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