मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अहम आदेश जारी
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के परिणाम इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्यप्रदे ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 15 Apr 2026 08:19:05 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Apr 2026 08:22:49 PM (IST)
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज।HighLights
- पुरुष आवेदन करने, भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश।
- महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण को चुनौती का मामला।
- कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर होने वाली 800 से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश के तहत याचिकाकर्ता पुरुष अभ्यर्थियों को आवेदन करने और भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के परिणाम इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है।
दरअसल, संतोष कुमार लोधी व अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग आफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर अधिवक्ता विशाल बघेल ने दलील दी कि कर्मचारी चयन मंडल के विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100 प्रतिशत केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। दलील दी गई कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती व पदोन्नति नियम, 2023' के तहत नर्सिंग आफिसर के पद के लिए कोई जेंडर आधारित प्रतिबंध नहीं है।
मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग आफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रविधान वैधानिक नियमों के विपरीत है। तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग-जीएनएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। महज जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है।