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    जबलपुर के गोलबाजार की 12,800 वर्गफुट भूमि पर हाई कोर्ट की नजर, निगम का दावा-लीज खत्म

    अब अगली सुनवाई में विवाद का केंद्रीय प्रश्न यह होगा कि क्या कथित कब्जाधारी अपने अधिकार का विधिसम्मत आधार सिद्ध कर पाते हैं।

    By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
    Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 02:29:42 PM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 02:29:42 PM (IST)
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    जबलपुर के गोलबाजार की 12,800 वर्गफुट भूमि पर हाई कोर्ट की नजर, निगम का दावा-लीज खत्म
    स्वामित्व और कब्जे के विवाद ने शुक्रवार को हाई कोर्ट में नया मोड़ ले लिया। सौजन्‍य एआई

    HighLights

    1. कोर्ट ने कहा, अधिकार है तो दस्तावेज पेश करें
    2. सभी पक्षों को 30 जून तक अंतरिम राहत प्रदान
    3. बेदखली और ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस जारी

    नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। गोलबाजार की करोड़ों रुपये मूल्य की 12,800 वर्गफुट भूमि पर लंबे समय से चले आ रहे स्वामित्व और कब्जे के विवाद ने शुक्रवार को हाई कोर्ट में नया मोड़ ले लिया।

    विवादित प्लाट नंबर-एक निगम की संपत्ति है

    नगर निगम ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि विवादित प्लाट नंबर-एक निगम की संपत्ति है, संबंधित लीज वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है और उसका कभी नवीनीकरण नहीं हुआ। निगम के अनुसार वर्तमान में भूमि पर काबिज व्यक्तियों के पास वैध अधिकार का कोई आधार नहीं है तथा उनके विरुद्ध बेदखली और ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

    हाई कोर्ट का फोकस : कब्जा नहीं, अधिकार का प्रमाण

    मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने न्यायालय के समक्ष कहा कि भूमि पर अधिकार का दावा करने वाले व्यक्तियों को यह स्पष्ट करना होगा कि उनके पक्ष में आज भी कोई वैध और प्रभावशील लीज अस्तित्व में है या नहीं। इस पर अदालत ने केल्सिया गुप्ता सहित सभी दावेदारों को तीन दिनों के भीतर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।


    30 जून तक राहत, फिर कानूनी दावों की होगी परीक्षा

    हाई कोर्ट ने फिलहाल सभी पक्षों को 30 जून तक अंतरिम राहत प्रदान करते हुए नगर निगम को उनका पक्ष सुनने और जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में विवाद का केंद्रीय प्रश्न यह होगा कि क्या कथित कब्जाधारी अपने अधिकार का विधिसम्मत आधार सिद्ध कर पाते हैं।

    पहले भी नहीं मिली थी अंतरिम राहत

    उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट पूर्व में अपने उस आदेश पर अंतरिम स्थगन देने से इंकार कर चुका है, जिसमें जिला प्रशासन और नगर निगम को शासकीय भूमि पाए जाने की स्थिति में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में 30 जून की सुनवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रशासनिक कार्रवाई का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त होगा

    कानूनी हलकों की नजर अब इस बात पर है कि दावेदार वैध लीज का अस्तित्व साबित कर पाते हैं या गोलबाजार की बहुचर्चित भूमि से अतिक्रमण हटाने की दिशा में प्रशासनिक कार्रवाई का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाता है।

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