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एमपी हाई कोर्ट ने चाकू की नोक पर महिला से अभद्रता करने वाले पुलिस कांस्टेबल की बहाली से किया इनकार

किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। केवल आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय कार्रवाई स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 11:44:43 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 11:47:43 AM (IST)
एमपी हाई कोर्ट ने चाकू की नोक पर महिला से अभद्रता करने वाले पुलिस कांस्टेबल की बहाली से किया इनकार
विभागीय जांच और आपराधिक ट्रायल के मानदंड अलग हैं।

HighLights

  1. कदाचार सिद्ध होने से बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह उचित
  2. सिविल लाइंस थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई थी
  3. एफआइआर दर्ज होने के बाद विभागीय जांच में आरोप सिद्ध

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने रीवा पुलिस लाइन के बर्खास्त आरक्षक रामफल अहिरवार की सेवा में बहाली की याचिका निरस्त कर दी।

चाकू की नोक पर अभद्रता जैसा आचरण स्वीकार नहीं

कोर्ट ने साफ किया कि अनुशासित पुलिस बल के सदस्य से महिला के साथ चाकू की नोक पर अभद्रता जैसा आचरण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। केवल आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय कार्रवाई स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।

आरक्षक ने चाकू दिखाकर उसे धमकाया और अभद्रता की

दरअसल, 10 जून, 2017 को आटो में सफर कर रही युवती द्वारा स्कार्फ हटाने से इनकार करने पर आरक्षक ने कथित रूप से चाकू दिखाकर उसे धमकाया और अभद्रता की।

तत्कालीन एसपी ने छह जून, 2018 को उसे बर्खास्त किया था

सिविल लाइंस थाने में एफआइआर दर्ज होने के बाद विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए गए और तत्कालीन एसपी ने छह जून, 2018 को उसे बर्खास्त कर दिया।

संदेह का लाभ मिलने पर आरक्षक ने बहाली की मांग की

बाद में आपराधिक न्यायालय से संदेह का लाभ मिलने पर आरक्षक ने बहाली की मांग की, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच और आपराधिक ट्रायल के मानदंड अलग हैं।

कदाचार सिद्ध होने से बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह उचित

विभागीय साक्ष्यों में गंभीर कदाचार सिद्ध होने से बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह उचित है।

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