
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने जबलपुर एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर राज्य सरकार से सुझाव मांगा है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार से यह बताने को कहा है कि जबलपुर से अधिक संख्या में फ्लाइट संचालित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। जबलपुर निवासी इंजीनियर सुधीर दत्त व विधि छात्र पार्थ श्रीवास्तव की ओर से जबलपुर एयरपोर्ट में सुविधाओं और हवाई सेवाओं के विस्तार की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर एयरपोर्ट के विस्तार और उन्नयन पर करीब 480 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। एयरपोर्ट का रनवे 2750 मीटर लंबा है और इसे बड़े विमानों के संचालन के अनुकूल बताया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता संघी ने तर्क दिया कि पर्याप्त आधारभूत ढांचा विकसित किए जाने के बावजूद जबलपुर से वर्तमान में केवल पांच फ्लाइट संचालित हो रही हैं। पूर्व और पश्चिम दिशा के प्रमुख शहरों के लिए भी जबलपुर से सीधी हवाई सेवा उपलब्ध नहीं है। इससे यात्रियों को अन्य शहरों के माध्यम से यात्रा करनी पड़ती है।
कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि वर्तमान में इंदौर से करीब 80, भोपाल से 30, रीवा से 20 और ग्वालियर से 15 फ्लाइट संचालित हो रही हैं, जबकि जबलपुर में हाई कोर्ट और सैन्य मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान होने के बावजूद उड़ानों की संख्या सीमित है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एयरपोर्ट के विस्तार के अनुरूप यहां हवाई सेवाओं का भी विस्तार होना चाहिए।
मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि जबलपुर से हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं और अधिक विमान सेवाओं के संचालन के लिए किन संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
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