
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान अनुचित पहनावे और आचरण पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिये को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
न्यायालय ने पूछा है कि उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। साथ ही राज्य शासन को संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने यह आदेश जीएसबी कंस्ट्रक्शन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। आदेश के अनुसार, न्यायालय ने नौ अक्टूबर 2026 को संबंधित अधिकारी को अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। ऐसा नहीं होने पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया था।
सुनवाई के दौरान अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बिस्तर पर उपस्थित हुए। उस समय वह शर्ट के बटन बंद कर रहे थे और अंडरवियर पहने हुए थे। न्यायालय ने उनके इस आचरण को न्यायालय की गरिमा के प्रतिकूल और अवमाननापूर्ण माना।
मामले में भूमि के उपयोग के वर्गीकरण में गलती सुधारने का मुद्दा भी सामने आया। न्यायालय ने अनुपालन प्रतिवेदन का अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विचार करते समय भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदन दिए जाने का उल्लेख किया गया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तीन अक्टूबर 2025 के पत्र की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसके अनुसार भूमि के मानचित्र और प्रकृति में सुधार की अनुशंसा पहले ही भेजी जा चुकी थी। यह अनुशंसा संबंधित भूमि को औद्योगिक दर्ज किए जाने की त्रुटि सुधारने के लिए थी, जबकि मास्टर प्लान में उसे आवासीय क्षेत्र दर्शाया गया था।
संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, जबलपुर ने तीन अक्टूबर 2025 को यह अनुशंसा भोपाल स्थित संचालनालय में संयुक्त संचालक (आइटी) को भेजी थी। इसके बावजूद याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर पारित आदेश को न्यायालय ने महज औपचारिकता करार दिया।
राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि याचिकाकर्ता एएलपीएएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। इसके बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी सात दिन के भीतर आवेदन अपलोड कराने और उसे स्वीकार कराने में सहायता सुनिश्चित करें।
आवेदन अपलोड होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर उस पर निर्णय भी लिया जाए। कोर्ट ने राज्य की ओर से उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई के आश्वासन को ध्यान में रखते हुए चार सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। अधिकारी को इसी अवधि में कारण बताओ नोटिस का जवाब भी प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
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