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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वन विभाग प्रमुख को लगाई फटकार, सरकारी धन बर्बादी से नाराज; 18 सितंबर को पेश होने का आदेश

मामला सतना जिले की वन समितियों से जुड़े 25 मजदूरों के न्यूनतम वेतन से संबंधित है। हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2022 को इन मजदूरों को न्यूनतम वेतनमान देने का ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 02:20:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 02:31:11 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वन विभाग प्रमुख को लगाई फटकार, सरकारी धन बर्बादी से नाराज; 18 सितंबर को पेश होने का आदेश
जबलपुर उच्च न्यायालय ने लगाई फटकार

HighLights

  1. जबलपुर हाईकोर्ट ने वन विभाग प्रमुख को फटकारा
  2. निजी अधिवक्ता कर याचिका दाखिल करने का आरोप
  3. 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाईकोर्ट ने सरकारी वकील उपलब्ध होने के बावजूद निजी अधिवक्ता नियुक्त कर पुनर्विचार याचिका दाखिल कराने पर वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि करदाताओं की गाढ़ी कमाई से प्राप्त सरकारी धन की इस तरह बर्बादी स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

मामला सतना जिले की वन समितियों से जुड़े 25 मजदूरों के न्यूनतम वेतन से संबंधित है। हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2022 को इन मजदूरों को न्यूनतम वेतनमान देने का आदेश दिया था। इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए वन विभाग की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि याचिका सरकारी अधिवक्ता के बजाय निजी वकील के माध्यम से दाखिल की गई।


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कोर्ट ने सवाल किया कि जब शासकीय अधिवक्ता उपलब्ध थे तो निजी वकील क्यों नियुक्त किया गया और उसकी फीस सरकारी खजाने से क्यों दी गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को यह भी बताना होगा कि निजी अधिवक्ता की नियुक्ति का निर्णय किस अधिकारी ने लिया तथा सरकारी धन पर पड़े आर्थिक भार की जिम्मेदारी किसकी होगी।

अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से बुलाए जाने पर की गई आपत्ति भी कोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी अधिकारी जनता के धन के संरक्षक हैं और उसके उपयोग की जवाबदेही से बच नहीं सकते।

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