
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश विशेष सशस्त्र बल(एसएएफ) में 650 से अधिक पदों पर निकली बैंड भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में भर्ती नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए गए हैं।
कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया है। विभाग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब और भर्ती का पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी रणजीत सिंह ठाकुर और मंडला निवासी पवन पुट्टा की याचिका में कहा गया कि भर्ती नियमावली की कंडिका आठ के अनुसार एक पद के विरुद्ध तीन अभ्यर्थियों को स्किल टेस्ट या इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था।
विभाग ने जारी की 1200 अभ्यर्थियों की सूची
इस हिसाब से 650 से अधिक पदों के लिए करीब 2100 अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने केवल 1200 अभ्यर्थियों की सूची जारी की। कटऑफ नहीं बताने पर सवाल याचिका में कहा गया कि सूची में एससी, एसटी और अनारक्षित वर्ग के कटऑफ अंक भी जारी नहीं किए गए। कई अभ्यर्थियों के स्किल टेस्ट और वीडियोग्राफी होने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
यह भी पढ़ें- खजुराहो से एयरलिफ्ट कर जबलपुर मेडिकल काॅलेज लाया गया, 4 हाथ और 4 पैर वाले नवजात की स्थिति गंभीर
सितंबर में होगी अगली सुनवाई
अधिवक्ता ने मीडिया रिपोर्टों के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवालों का भी उल्लेख किया। याचिका में पूरी प्रक्रिया की न्यायिक जांच और मूल रिकॉर्ड कोर्ट में प्रस्तुत कराने की मांग की गई है। अब भर्ती का परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। अगली सुनवाई सितंबर में होगी।
यह भी पढ़ें- जबलपुर में मौत के बाद वर्षभर तक रोज 10 हजार निकाले, पासबुक अपडेट कराई तो खाते में 10 लाख रुपये कम