मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा की मेरिट लिस्ट हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन
लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी, 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने हां का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। इसके ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 15 Apr 2026 07:48:04 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Apr 2026 07:52:00 PM (IST)
मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षाHighLights
- प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा की मेरिट लिस्ट अंतिम निर्णय के अधीन।
- अंतरिम आदेश : राज्य शासन व मप्र कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस।
- नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जबाब पेश करने के निर्देश दे दिए गए।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से पांच प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने के आरोप को गंभीरता से लिया।
इसी के साथ अंतरिम आदेश के जरिए मेरिट लिस्ट विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दी। साथ ही राज्य शासन व मप्र कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जबाब पेश करने के निर्देश दे दिए।
याचिकाकर्ता नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया सहित अन्य उम्मीदवारों की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा, विशाल बघेल व आयुष बघेल ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल उन उम्मीदवारों को पांच प्रतिशत बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है।
चयन सूची में लगभग 14 हजार 964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं। याचिका में भारतीय पुनर्वास परिषद के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पूरे प्रदेश में आरसीआई पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। ऐसे में लगभग 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथमदृष्ट्या फर्जी प्रतीत होता है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी, 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने हां का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। इसके बावजूद सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल के द्वारा उम्मीदवारों से आरसीआई पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया ।
नहीं हुआ भौतिक सत्यापन
- बिना किसी भौतिक सत्यापन के साफ्टवेयर के माध्यम से उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन के आधार सीधे बोनस अंक दे दिए गए।
- इससे वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों की मेरिट गिर गई और वे चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए।
- दलील दी गई कि झूठी जानकारी देकर चयन होने के बाद सैकड़ों अभ्यर्थी जिन्हें मेरिट में पांच प्रतिशत बोनस अंक मिले हैं, वे भी हाइ कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं।
- उन्होंने कहा है कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के कारण उनके द्वारा बोनस अंक का लाभ प्राप्त कर लिया जबकि उनके पास उससे संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र नहीं है।
- याचिका में 27 फरवरी, 2026 को जारी दोषपूर्ण मेरिट लिस्ट को निरस्त करने की मांग की गई है व केवल वैध आरसीआई प्रमाणपत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने की मांग की गई है।