नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश के जरिए नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन व अवैध रूप से मछली पकड़ने पर रोक लगा दी।
अवैध रेत खनन और मत्स्याखेट को चुनौती देने के मामले में कोर्ट ने मछुआरा कल्याण व मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी ईओडब्ल्यू, जिला माइनिंग अधिकारी व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह ने जनहित याचिका दायर कर नर्मदा और खिरहनी घाट में अवैध रेत खनन और माहसीर मछली पकड़ने को चुनौती दी है।
अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि माहसीर को राज्य मछली का दर्जा प्राप्त है। नर्मदा और खासतौर पर खिरहनी घाट इस का अवैध रूप से मत्स्याखेट हो रहा है।
खासतौर पर ब्रीडिंग के मौसम में माहसीर मछली को पकड़ने पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए, क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार लगातार आखेट के कारण मछली की यह प्रजाति विलुप्त हो रही है।
इसके संरक्षण के प्रयास के बावजूद अवैध मत्स्याखेट और अवैध रेत खनन के कारण माहसीर प्रजाति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं
खिरहनी घाट में प्रशासन ने छह मार्च 2026 को दो हाइवा और अवैध रेत भंडारण को जब्त किया था। इसकी सुपुर्दगी खिरहनी के उप सरपंच राजेंद्र यादव की दी गई थी। इस पर क्षत्री यादव और उसके भाई ने उप सरपंच को धमकी दी। इतना ही नहीं, उसी रात जब्त की गई अवैध रेत को क्षत्री यादव ने चुरा लिया। नामजद रिपोर्ट के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।