प्रोबेशनरी पीरियड में कम सैलरी के नियम को MP हाईकोर्ट में चुनौती... राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस
MP High Court News: मध्यप्रदेश में प्रोबेशनरी पीरियड के दौरान चरणबद्ध वेतन भुगतान के नियम को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेव ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 12 Feb 2026 12:16:57 AM (IST)Updated Date: Thu, 12 Feb 2026 12:16:57 AM (IST)
प्रोबेशनरी पीरियड में वेतन कटौती नियम पर MP हाईकोर्ट सख्त। फाइल फोटोHighLights
- वेतन कटौती नियम पर जवाब-तलब
- प्रोबेशनरी पीरियड वेतन नियम पर नोटिस
- 70-80-90 प्रतिशत वेतन व्यवस्था चुनौती
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: मध्य-प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डबल बेंच ने प्रोबेशनरी पीरियड में चरणबद्ध वेतन देने के नियम को चुनौती देने वाले मामले में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
समान कार्य के लिए समान वेतन की दलील
याचिकाकर्ता आनंद कुमार मिश्रा सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने पक्ष रखते हुए कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग में नियुक्त शिक्षक नियमित शिक्षकों की तरह चयनित हुए हैं। ऐसे में प्रोबेशनरी पीरियड के दौरान उन्हें पूर्ण वेतन न देना अनुचित है।
याचिका में वर्ष 2019 में लागू वेतन कटौती संबंधी व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई है। दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने शासन से जवाब मांगा है।
2018 भर्ती के 1070 शिक्षक प्रभावित
याचिका के अनुसार, वर्ष 2018 में जारी विज्ञापन के माध्यम से चयनित 1070 शिक्षक इस नियम से प्रभावित हैं। परिणाम घोषित होने के बाद वर्ष 2019 में सरकार ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान ही प्रोबेशनरी पीरियड तीन वर्ष निर्धारित कर दिया। साथ ही पहले वर्ष 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान लागू किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियुक्ति के बाद बदले गए इस नियम के तहत वेतन भुगतान किया जाना अनुचित है।
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