
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने इटारसी नगर पालिका में कथित 14.20 करोड़ के अवैध भुगतान मामले में स्पष्ट कर दिया है कि केवल अधिकारियों से प्रतिवेदन मंगाकर शिकायतों को लंबित नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन को 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर विधिसम्मत निर्णय लेने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, आनंद शुक्ला और अपूर्व त्रिवेदी ने पैरवी की।
कोर्ट ने उनकी बहस सुनने के बाद इटारसी के पत्रकार सुरेश कुमार चिंचवाड़ की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगरीय प्रशासन विभाग को 90 दिनों में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मामला इटारसी नगर पालिका परिषद में 35 माह के दौरान 14,20,51,378 के कथित अवैध भुगतान से जुड़ा है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि मध्य प्रदेश नगर पालिका (लेखा एवं वित्त) नियम, 2018 के नियम 85(2) तथा शासन के छह अगस्त, 2022 के आदेश का उल्लंघन करते हुए फर्जी नोटशीट के आधार पर भुगतान किए गए, जिससे नगर पालिका को भारी वित्तीय क्षति हुई।
आरोप तत्कालीन अध्यक्ष पंकज चौरे, मुख्य नगर पालिका अधिकारी रितु मेहरा तथा अन्य अधिकारियों पर लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि कई शिकायतों और प्रतिवेदनों के बावजूद विभाग ने केवल आयुक्त से रिपोर्ट मंगाकर मामला लंबित रखा और ठोस जांच नहीं कराई।
हाई कोर्ट ने इस रवैये पर अप्रत्यक्ष रूप से असंतोष जताते हुए प्रमुख सचिव को शिकायतों की विधिवत जांच कर 90 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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