MP हाई कोर्ट ने 30 हजार करोड़ के माइनिंग घोटाले के आरोप पर मांगा जवाब
याचिका में मांग की गई कि इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई से जांच कराई जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि हकीकत में रायल्टी चोरी महज 19 करोड़ नहीं बल्कि 30 हजार ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 04 Feb 2026 08:32:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Feb 2026 08:37:38 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।HighLights
- राज्य शासन ने की है महज 19 करोड़ की रायल्टी चोरी की गणना
- जनहित याचिकाकर्ताओं ने सीबीआई से जांच कराने पर दिया बल
- कंपनी को हर साल रायल्टी और डेवलपमेंट फीस जमा करनी थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने छतरपुर में 30 हजार करोड़ के माइनिंग घोटाले के आरोप पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में खनिज स्रोत विभाग के सचिव, मप्र स्टेट माइनिंग कारपोरेशन के एमडी, कलेक्टर छतरपुर सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं।
जनहित याचिकाकर्ता छतरपुर की ग्राम पंचायत भैरा के सरपंच शिवराम दीक्षित व दिलीप सिंह की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अनूपपुर की किसान मिनरल्स प्रायवेट लिमिटेड ने स्टेट माइनिंग कारपोरेशन के साथ 2007 में संयुक्त समझौता किया था।
इसके तहत कंपनी को हर साल रायल्टी और डेवलपमेंट फीस जमा करनी थी। वर्ष 2021 में जांच के बाद कंपनी पर 19 करोड़ रुपये की रायल्टी निकाली। यह दलील दी गई कि शर्त के अनुसार कंपनी ने बैंक गारंटी के रूप में एफडी भी जमा नहीं की है। इसके बाद वर्ष 2024 में भी एक जांच हुई, जिसे दबा दिया गया।
याचिका में मांग की गई कि इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई से जांच कराई जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि हकीकत में रायल्टी चोरी महज 19 करोड़ नहीं बल्कि 30 हजार करोड़ है। संबंधित विभाग के अधिकारियों का रवैया जांच का विषय है। कुल मिलाकर मिलीभगत से गड़बड़ी हुई है, जिस पर पर्दा डालाा जा रहा है।