
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिजली की मांग भले पीक पर नहीं है लेकिन ब्रेकडाउन चालू हो गया है। प्रदेश में डिमांड 14 हजार मेगावाट के आसपास बनी है फिर भी रात के वक्त कम बिजली का उत्पादन किया जा रहा है जबकि दिन के सोलर बिजली उत्पादन अधिक होने से डिमांड पूरी की जा रही है।
वहीं रात के वक्त बिजली की मांग थर्मल प्लांट पर अधिक निर्भर रहती है ऐसे में इसमें गुपचुप कटौती हो रही है। हालांकि अफसर इसे सामान्य रूप से ब्रेकडाउन बता रहे हैं। इधर कटौती का हल्ला न हो तो एक-दो घंटे के लिए ग्रामीण इलाकों में बिजली की आपूर्ति बाधित की जा रही है। बता दें कि कोयले की खपत को कम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है इससे तकरीबन तीन हजार टन कोयले की खपत कम की जा रही है।
बिजली की मांग को भरपूर होने का दावा किया जा रहा है लेकिन आंकड़ों में ऐसा नहीं है मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी थर्मल पावर क्षमता 4570 मेगावाट है। इसमें औसत तीन हजार मेगावाट ही बिजली का उत्पादन हो रहा है। 700-800 मेगावाट हाइड्रल यानी बांधों से बिजली पैदा हो रही है।
इसके अलावा सिंगाजी की 660 मेगावाट की एक इकाई और बिरसिंहपुर की एक इकाई को बंद रखा गया है जिसे जल्द चालू करने का दावा हो रहा है। जेनको के अफसरों का कहना है कि रात के वक्त दो-चार घंटे के लिए बिजली का उत्पादन कम करने के लिए इकाइयों से उत्पादन क्षमता कम की जाती है। ऐसे में रात के वक्त ग्रामीण इलाकों में बिजली की आपूर्ति को बंद किया जाता है। शहरी क्षेत्रों में बिजली बंद होने से हंगामा अधिक होने की संभावना है ऐसे में गांव की बिजली बंद की जा रही है।
मप्र पावर जेनको के सभी थर्मल पावर प्लांट में 13 मई से 19 मई 2026 के बीच 535 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया है। अधिकारियों की मानें तो करीब 3500 टन कोयले की खपत को हर दिन कम कर दिया गया है। इसमें इकाई बंद होने के कारण भी खपत कम होना शामिल है।
इस संबंध में मप्र पावर जनरेशन कंपनी के एमडी मनजीत सिंह ने कहा कि यूनिट की ट्रिपिंग और ब्रेकिंग डाउन हो रहा है उन्होंने साफ किया कि देश में जरूर बिजली की मांग पीक पर है लेकिन मप्र में ऐसा नहीं है यहां रबी सीजन में बिजली की मांग पीक पर जाती है। अभी बिजली की मांग सामान्य है जिसके लिए पर्याप्त बिजली है ऐसे में हम अपनी इकाइयों को बंद रखते हैं ताकि ओवरहालिंग कर सकें।
तीन हजार मेगावाट के आसपास थर्मल पावर प्लांट चल रहे हैं। मांग जब सामान्य होती है तो शाम के वक्त इकाइयों को दो-चार घंटे के लिए उत्पादन कम किया जाता है।
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