एमयू का डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम विश्वसनीय : हाई कोर्ट ने री-वैल्यूएशन की मांग निरस्त की, छात्रों पर लगाया जुर्माना
दोनों ने दावा किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं में कुछ उत्तर सही चिन्हित होने के बावजूद उनके अंक नहीं जोड़े गए।
Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 01:18:47 PM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 01:18:47 PM (IST)
कोर्ट ने भविष्य में अधिक स्पष्टता के लिए टचस्क्रीन डिवाइस और डिजिटल पेन के उपयोग का सुझाव दिया। नईदुनियाHighLights
- पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
- स्वतंत्र विशेषज्ञों से पुनर्मूल्यांकन कराया
- मूल्यांकन में किसी प्रकार त्रुटि या पक्षपात नहीं था
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर (एमयू) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय मानते हुए पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाले दो छात्रों की याचिकाएं निरस्त कर दीं।
बीएचएमएस छात्र व एमएससी नर्सिंग छात्रा की याचिकाओं पर सुनवाई
कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने यह आदेश जबलपुर निवासी बीएचएमएस छात्र अमरजीत भारद्वाज तथा एमएससी नर्सिंग छात्रा प्रेमलता तिवारी की याचिकाओं पर सुनाया।
जांच में नर्सिंग छात्रा के अंक यथावत रहे
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हाई कोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं का स्वतंत्र विशेषज्ञों से पुनर्मूल्यांकन कराया। जांच में नर्सिंग छात्रा के अंक यथावत रहे।
छात्र को पहले से भी कम अंक मिले
बीएचएमएस छात्र को पहले से भी कम अंक मिले। इसके बाद कोर्ट ने माना कि मूल मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि या पक्षपात नहीं था।
तो पुनर्मूल्यांकन का अधिकार नहीं बनता
कोर्ट ने कहा कि एमयू का डिजिटल फेयर इवैल्यूएशन सिस्टम पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है तथा केवल अपेक्षा से कम अंक मिलने के आधार पर पुनर्मूल्यांकन का अधिकार नहीं बनता। ,
टचस्क्रीन डिवाइस और डिजिटल पेन के उपयोग का सुझाव
कोर्ट ने भविष्य में अधिक स्पष्टता के लिए टचस्क्रीन डिवाइस और डिजिटल पेन के उपयोग का सुझाव दिया, ताकि अंकन प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो सके।
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