
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नर्मदा तट पर बसे शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के एक लाख घरों के लोग अब भी बोरिंग, कुआं, जलाशयों के पानी पर निर्भर हैं। इन घरों तक नर्मदा जल नहीं पहुंच पाया है। इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद बोरिंग का पानी पीने वालों की चिंता भी बढ़ गई है। क्योंकि शहर के कुछ क्षेत्रों में भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है।
पर्यावरणविद् और वाटर क्वॉलिटी इंजीनियर डॉ. विनोद दुबे के अनुसार मदनमहल, मेडिकल कॉलेज, शास्त्री नगर, भूकंप कॉलोनी सहित तिलवारा क्षेत्र में बोरिंग का पानी इससे प्रभावित है। इस क्षेत्र में ग्रेनाइट की चट्टानें हैं। जमीन में लगभग 150 फीट नीचे फ्लोराइड की पुष्टि हो चुकी है।
अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी मात्रा 1.3 से लेकर 5.1 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की जा चुकी है। अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने से दांतों में पीलापन (डेंटल फ्लोरोसिस), हड्डियों की कमजोरी जैसी अन्य समस्याएं होती हैं। फिर भी इन क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश परिवार बोरिंग का पानी पीने विवश हैं।
महाराणा प्रताप वार्ड अंतर्गत गजरथ नगर के आधे क्षेत्र में कहीं-कहीं नर्मदा जल पहुंच चुका है, परंतु अधिकांश परिवार अब भी बोरिंग के पानी पर आश्रित हैं। हालांकि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पिछले 20 दिनों से नर्मदा जल की आपूर्ति ठप है।
स्थानीय निवासी रानी बहलोतकर, आरती सोनी, कमलेश झारिया, दीपंकर ठाकुर ने बताया कि बोरिंग का पानी बहुत खारा और बेस्वाद है, जो हलक से नीचे नहीं उतरता।
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शास्त्री नगर क्रेशर बस्ती में भी नर्मदा जल नहीं पहुंच पाया है। बस्ती के लोग बोरिंग का पानी पीने को विवश हैं, जबकि भूजल में फ्लोराइड की अधिकता है। इसी तरह अधारताल, न्यू रामनगर अमखेरा की न्यू साहेब परिसर कॉलोनी, संजय नगर, आनंद नगर, मोहरिया सहित अन्य क्षेत्रों के रहवासी भी बोरिंग, कुआं व परियट, खंदारी जलाशय से होने वाली जलापूर्ति पर निर्भर हैं।
पानी में ज्यादा फ्लोराइड हड्डियों को स्केलेटल फ्लोरोसिस (हड्डियों का टेढ़ा होना और दर्द), जोड़ों में अकड़न और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है, जिससे हीमोग्लोबिन कम होने का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि यह शरीर के कई अंगों और एंजाइमों को प्रभावित करता है। हड्डियां कमजोर और मोटी हो जाती हैं। जोड़ों में दर्द और गतिशीलता में कमी आती है, जिससे अपंगता का जोखिम बना रहता है। फ्लोराइड हड्डियों में जमा होकर कैल्शियम संतुलन बिगाड़ता है और स्नायुबंधन को सख्त कर देता है।
-डॉ. सुधीर तिवारी, आर्थोपेडिक सर्जन
अमृत 2.0 परियोजना के तहत हर घर में नर्मदा जल पहुंचाने का कार्य जारी है। जनवरी 2026 तक सभी घरों में नर्मदा का मीठा पानी पहुंचने लगेगा। वर्तमान में पानी के सैंपलों की जांच की जा रही है। यदि किसी को पानी से कोई परेशानी है तो वह संबंधित जोन कार्यालय के माध्यम से सैंपल की जांच लैब में करा सकते हैं।
-कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, जल नगर निगम