
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बी-फार्मा और डी-फार्मा पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया में तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने काउंसलिंग शुल्क जमा कर पूरी प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन अब उन्हें दोबारा इंतजार करना पड़ेगा।
डीटीई ने बी-फार्मा और डी-फार्मा प्रवेश के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित की थी, जिसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 1,500 रुपये का पंजीयन शुल्क लिया गया।
21 जुलाई को प्रथम चरण की काॅमन मेरिट लिस्ट जारी की गई, जिसमें करीब 7,566 अभ्यर्थियों के नाम और रैंक प्रकाशित किए गए। विभागीय कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई को सीटों का आवंटन होना था।
अभ्यर्थी आवंटन सूची का इंतजार कर रहे थे, लेकिन 24 जुलाई को विभाग की वेबसाइट पर सूचना प्रदर्शित हुई कि पूर्व में जारी मेरिट सूची निरस्त कर दी गई है। अब सितंबर में संशोधित मेरिट सूची जारी कर आगे की प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस अचानक लिए गए निर्णय से विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि मेरिट सूची जारी होने के बाद वे प्रवेश को लेकर आश्वस्त हो गए थे और आगे की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। बिना स्पष्ट कारण बताए पूरी सूची निरस्त कर देने से विद्यार्थियों का समय और मानसिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं।
अभिभावकों ने मांग की है कि डीटीई इस निर्णय के पीछे का कारण सार्वजनिक करे तथा प्रवेश प्रक्रिया की नई समय-सारिणी स्पष्ट रूप से जारी करे, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
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