
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिला स्वास्थ्य विभाग में 93 लाख रुपये के फर्जी बिल भुगतान मामले की जांच अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अब मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में उपकरण खरीदी से लेकर रंगाई-पुताई में फर्जीवाड़ा सामने आया है। कई कार्य कागजों में पूर्ण दर्शाकर लाखों की हेराफेरी की गई। जिले में 58 संजीवनी क्लीनिकों पर 43 लाख रुपये खर्च बताया गया है।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर गठित टीम संजीवनी क्लीनिकों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। रविवार को भी प्रशासन के अधिकारी संजीवनी क्लीनिक पहुंचे। संजीवनी क्लीनिक के नोडल अधिकारी पर भी प्रशासन का शिकंजा कस रहा है।
क्लीनिकों का भौतिक सत्यापन
बिल डिस्टेंपर का बिल लगाया, चूना पुतवा दिया-एसडीएम रघुवीर मरावी के नेतृत्व में गठित टीम संजीवनी क्लीनिकों का भौतिक सत्यापन कर रही है। विस्तृत रिपोर्ट सोमवार को कलेक्टर को सौंपी जाएगी। अब तक चली जांच में पता चला है कि कई संजीवनी क्लीनिकों में रंगाई-पुताई नहीं हुई पर राशि निकाल ली गई। वहीं क्लीनिकों में चूना पुतवाकर बिल डिस्टेंपर का लगाया गया है। कंप्यूटर सामग्री की खरीदी के प्रमाण भी कई क्लीनिकों में नहीं मिले। जबकि कंप्यूटर सामग्री के नाम पर भी खासी रकम खर्च की गई है। चौंकाने वाली जानकारी आई कि क्लीनिकों की मरम्मत के नाम पर भी राशि का गोलमाल किया गया है।
दस्तावेज कुछ, भौतिक सत्यापन में कुछ और
जांच के दौरान दस्तावेजों में जिन कंप्यूटरों की खरीदी दर्शाई गई है, वे संबंधित क्लीनिकों में स्थापित ही नहीं मिले। इतना ही नहीं, उन्हीं कंप्यूटरों के लिए प्रिंटर खरीदे जाने का रिकार्ड भी सामने आया है, जिससे गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है। भौतिक सत्यापन के दौरान बड़ा अंतर सामने आ रहा है।
कई अधिकारी संदेह के घेरे में
अब तक चली जांच में सात अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सभी के खिलाफ पुख्ता सबूत भी जुटाए गए हैं। सोमवार को जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपे जाने के बाद एफआईआर कराई जा सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जबलपुर के शहरी क्षेत्रों में करीब 58 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक हैं। जांच दल को पूरे गोलमाल में शामिल सात अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध सबूत मिले हैं। एसडीएम रघुवीर मरावी का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच हो रही है। कलेक्टर ही रिपोर्ट पर कार्रवाई करेंगे।
कोठारी को बनाया प्रभारी सीएमएचओ
डॉ. संजय मिश्रा के निलंबन के बाद जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डा. नवीन कोठारी को सीएमएचओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कलेक्टर राघवेंद्र ने रविवार शाम आदेश जारी किया। उल्लेख किया कि नियमित पदस्थापना या अग्रिम आदेश जारी होने तक कोठारी जिम्मेदारी संभालेंगे।
एक नजर में-आरोप के मुख्य बिंदु
-जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी ने निलंबित सीएमएचओ डा. संजय मिश्रा के साथ मिलीभगत करते हुए मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में कलेक्टर की अनुमति के बिना और भण्डार क्रय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करोड़ों रुपये के क्रय आदेश जारी करने की कार्यवाही की।
-न कोई सामग्री जिला स्टोर में रिसीव हुई, न कोई काम पूरा हुआ, फिर भी फर्मों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
-सिंह इंटरप्राइजेज, भोपाल को बिना कलेक्टर की अनुमति के 82 लाख 51 हजार का क्रय आदेश जारी कर भुगतान भी कर दिया। प्रचार प्रसार सामग्री प्राप्त नहीं हुई।
-जिले के शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में बिना रंगाई-पुताई किए, बिना कंप्यूटर सामग्री दिए लाखों रुपये का फर्जी भुगतान।
-जबलपुर की ट्रेडर्स फर्म को 25 लाख से अधिक का भुगतान, वर्क आर्डर 02 मार्च को जारी हुआ और मात्र चार दिन में बिल लगा दिया गया।
-जबलपुर की फर्मों से कंप्यूटर सामग्री ली ही नहीं गई, सीएमएचओ स्टोर में इसकी कोई एंट्री नहीं।
-सीएमएचओ स्टोर कीपर के स्टाक रजिस्टर में दर्ज प्रचार प्रसार सामग्री स्टोर में नहीं पाई गई।
-कलेक्टर की अनुमति नहीं ली गई, जेम में जो नोटशीट क्रय समिति के हस्ताक्षर की दी गई है, स्पेसिफिक कार्य की अनुमति नहीं ली गई है, केवल गाइडलाइन के नीचे साइन करवा लिया गया।
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