
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ से शहडोल के जैतपुर थाना क्षेत्र में 193.420 किलोग्राम गांजा बरामदगी और तीन लोगों की मौत से जुड़े बहुचर्चित तस्करी प्रकरण में कथित 'पायलट' मनीष शुक्ला को नियमित जमानत मिल गई।
पुलिस का आरोप है कि मनीष शुक्ला उन वाहनों की पायलटिंग कर रहा था, जिनसे गांजे की खेप ले जाई जा रही थी। हालांकि उसके कब्जे से न तो गांजा मिला और न ही कोई वाहन बरामद हुआ। कोर्ट ने कहा कि आवेदक के विरुद्ध मुख्य आधार सह-आरोपित का मेमोरेंडम है।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता निखिल भट्ट ने तर्क दिया कि पायलटिंग के आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और न ही किसी प्रकार की बरामदगी हुई है। राज्य शासन ने जमानत का विरोध किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि आवेदक से कोई मादक पदार्थ या वाहन जब्त नहीं हुआ।
दरअसल, यह प्रकरण 13-14 अप्रैल 2026 की रात कामता मोड़ के पास हुए हादसे से जुड़ा है, जिसमें तीन लोगों की कुएं में गिरने से मौत हुई थी। जांच के दौरान दुर्घटनाग्रस्त वाहनों से 193.420 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था। हाई कोर्ट ने प्रकरण के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना मनीष शुक्ला को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार पर रिहा करने के आदेश दिए।
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