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पिता को घर से निकालने पर बेटे को फटकारा, जबलपुर कलेक्टर ने सुनाई अनोखी सजा; बहू के उड़ गए होश

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007 के तहत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने दो अहम मामलों में बुजुर्गों के पक्ष में फैसला सुनाया...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 10:14:22 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 10:14:22 PM (IST)
पिता को घर से निकालने पर बेटे को फटकारा, जबलपुर कलेक्टर ने सुनाई अनोखी सजा; बहू के उड़ गए होश
तहसीलदार रांझी और थाना प्रभारी बेलबाग को आदेश का समय-सीमा में पालन कराने को कहा है। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. 70 वर्षीय पिता की अपील पर फैसला
  2. एक माह में मकान-दुकान खाली करो
  3. बहू को भी ससुर का घर छोड़ना होगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पिता को प्रताड़ित कर उनकी संपत्ति पर कब्जा जमाने वाले बेटे को एक माह के भीतर मकान और दुकान खाली करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने किए एसडीएम के पूर्व आदेश निरस्त

दूसरे मामले में 87 वर्षीय बुजुर्ग की बहू को भी एक माह में मकान खाली करना होगा। दोनों मामलों में कलेक्टर ने एसडीएम के पूर्व आदेश निरस्त करते हुए तहसीलदार और संबंधित थाना प्रभारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

वसीयत करने के बाद देने लगा प्रताड़ना

मदन महल निवासी 70 वर्षीय बसंत कुमार रामचंदानी ने अपील में बताया कि उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी कमाई से बेलबाग मेन रोड पर 1050 वर्गफुट का दो मंजिला मकान खरीदा था। इसमें दुकानें भी हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने बेटे सुनील कुमार रामचंदानी के नाम संपत्ति की वसीयत पंजीकृत कराई थी।


शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया

पिता का आरोप है कि इसके बाद बेटे ने उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और घर से बाहर निकाल दिया।बुजुर्ग के मुताबिक, उन्होंने जुलाई 2025 में वसीयत निरस्त करा दी, लेकिन बेटे ने संपत्ति पर कब्जा नहीं छोड़ा।

मकान के बावजूद भटकने के लिए मजबूर

यह भी बताया कि बेटे के पास खेरमाई मंदिर के सामने कृपाल चौक और मदन महल रोड महानद्दा में मकान हैं। इसके बावजूद उन्हें भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा।

धारा 16 के तहत कलेक्टर न्यायालय में अपील

इस मामले में एसडीएम रांझी ने 22 अप्रैल 2026 को संपत्ति विवाद बताते हुए बेदखली का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था। इसके बाद पिता ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 16 के तहत कलेक्टर न्यायालय में अपील की।

पिता की संपत्ति में सम्मान से रहने का अधिकार

दोनों पक्षों के तर्क और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कलेक्टर ने कहा कि बुजुर्ग को अपनी स्वअर्जित संपत्ति में शांतिपूर्वक और सम्मान के साथ रहने का अधिकार है। सक्षम बेटे के पास रहने के अन्य साधन उपलब्ध हैं, इसलिए उसे पिता की संपत्ति से अलग रहना चाहिए।

पिता को कब्जा सौंपने के निर्देश

कलेक्टर ने बेटे को परिवार और सामान सहित एक माह में मकान-दुकान खाली कर पिता को कब्जा सौंपने के निर्देश दिए। तहसीलदार रांझी और थाना प्रभारी बेलबाग को आदेश का समय-सीमा में पालन कराने को कहा है।

87 साल के ससुर का मकान खाली करना होगा, बहू को एक माह की मोहलत

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने एसडीएम का आदेश निरस्त करते हुए बहू को परिवार और सामान सहित एक माह में मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया कि बहू के पास वैकल्पिक आवास भी उपलब्ध है। बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक माह की मोहलत दी गई है।

  • तहसीलदार अधारताल और थाना प्रभारी गोहलपुर को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
  • दरअसल गोहलपुर थाना क्षेत्र के त्रिमूर्ति नगर निवासी 87 वर्षीय रूपलाल कोरी टेलीग्राफ फैक्ट्री से सेवानिवृत्त हैं।
  • उन्होंने अपनी बचत से 1986 में 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था।
  • आरोप के मुताबिक, दिवंगत बेटे राकेश कोरी की पत्नी रेनू कोरी ने कमरों और दुकान पर कब्जा कर रखा है।
  • एसडीएम अधारताल ने 15 मई 2026 को इसे पारिवारिक संपत्ति विवाद मानते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था।
  • सुनवाई में बहू ने दावा किया कि मकान का पुनर्निर्माण उनके पति की आय से हुआ था।

सिविल कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला भी दिया

उन्होंने खुद और बेटे को कानूनी उत्तराधिकारी बताते हुए सिविल कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला भी दिया।कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने एसडीएम का आदेश निरस्त करते हुए बहू को परिवार और सामान सहित एक माह में मकान खाली करने के निर्देश दिए।

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